वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर ससंघ के सानिध्य में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो रहे हैं। पारसोला जैन समाज द्वारा 10 सितम्बर को आचार्य श्री के 75 वें अवतरण दिवस को हीरक जन्म जयंती महोत्सव के रूप में मनाया जाएगा। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
पारसोला। प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्टपरंपरा के पंचम पट्टाघीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी धरियावाद तहसील के पारसोला में 56वे वर्षायोग हेतु संघ सहित विराजित हैं। वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर ससंघ के सानिध्य में प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो रहे हैं। पारसोला जैन समाज द्वारा 10 सितम्बर को आचार्य श्री के 75 वें अवतरण दिवस को हीरक जन्म जयंती महोत्सव के रूप में मनाया जाएगा।
जैन समाज के अध्यक्ष जयंतीलाल कोठारी चातुर्मास समिति के ऋषभ लाल पचौरी, प्रवीण पचौरी ने बताया कि हीरक जन्म जयंती महोत्सव पर 10 सितम्बर को प्रातः 8 बजे पारसोला साबला मुख्य मार्ग पर प्रवासी जैन युवा संगठन कुवैत द्वारा नवनिर्मित वात्सल्य वारिधि प्रवेश द्वार का लोकार्पण होगा । इसके बाद दोपहर में मूलनायक पार्श्वनाथ जैन मंदिर से ससंघ के साथ भव्य शोभायात्रा निकाल कर श्यामा वाटिका पहुँच कर आचार्य श्री के 75वें अवतरण दिवस पर विनयांजलि व महाअर्चना की जाएगी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ मणिइंद्र जैन दिल्ली राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री दिगम्बर जैन महासमिति होंगे।
कार्यक्रम में आर के ग्रुप मुम्बई के सतीश देहरा एवं पार्टी द्वारा प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर महाराज के भजन का राष्ट्र को समर्पण होगा। रात्रि में आचार्य श्री 75 दीपक से भव्य आरती व भजन संध्या आयोजित होगी। समाजजनों ने बताया कि आचार्य श्री वर्धमान सागर आचार्य श्री शांतिसागर पट्ट परम्परा के वर्तमान में सबसे बड़े पंचम पट्टाघीश आचार्य हैं। इनका हीरक जयंती महोत्सव मनाना पारसोला नगर के लिए गौरव की बात है। हीरक जयंती के लिए तैयारियां जोरों से चल रही हैं। समाज के युवा वर्ग द्वारा बागड़ एवं मेवाड़ प्रांत के प्रत्येक जैन समाज के लोगों को घर-घर जाकर आमंत्रण पत्रिका वितरित की जा रही है।
उल्लेखनीय है कि सन 1990 में खाड़ी देशों में युद्ध के कारण बगड़ प्रांत पारसोला नगर के अनेक समाज जान वहां विपदा कष्ट में आ गए थे, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी एवं मुनि श्री वीर सागर जी के आशीर्वाद से जब संकल्प पूर्वक जाप करने से विपदा टल गई और सभी समाज जन सुरक्षित भारत आ गए थे। संकल्प अनुसार पारसोला में अभी इसी वर्ष आचार्य वर्धमानसागर जी ने नवनिर्मित समवशरण का पंचकल्याणक भव्य रूप से संपन्न कराया। पारसोला निवासी प्रवासी कुवैत के समाज जनों ने गुरु आशीर्वाद के उपकार के फलस्वरुप स्वागत नगर की शोभा भव्य स्वागत द्वार से होती है पारसोला नगर को यह गौरव है कि आचार्य वर्धमानसागर जी का वर्ष 1990 में आचार्य पद इसी नगर में संपन्न हुआ और आचार्य श्री द्वारा प्रथम मुनि और आर्यिका दीक्षा भी इसी पारसोला नगर में दी इस नगर से अनेक दिगंबर संत हुए हैं स्वागत द्वार का लोकार्पण आचार्य श्री की हीरक जन्म जयंती 75 वर्ष पर 10 सितंबर भाद्रपद शुक्ल सप्तमी को संपन्न होगा।
नगर गौरव मुनि श्री धर्मेंद्र सागर जी ,मुनि श्री ओम सागर जी, मुनि श्री सक्षम सागर जी, मुनि श्री समप्रतिष्ठित सागर जी, आर्यिका श्री गोम्मटमतीजी, आ श्री पूर्वी मतीजी ,आ श्री अभिन्न मतीजी, आ श्री मुदित मति जी ,आ श्री संगीतमति जी इस नगर के गौरव रत्न है।













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