समाचार

श्रमण मुनिपुंगव आचार्य श्री सुधासागर महाराज की धर्मसभा : बड़ों से आशीर्वाद भेंट में लें 


निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती 108 श्री सुधासागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि गुरु बड़ों से आशीर्वाद मांगना मत, गुरु बड़ों से आशीर्वाद भेंट में लेना। उन्होंने इस दौरान कई बातों के बारे में बताया पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट…


आगरा। निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती 108 श्री सुधासागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि गुरु बड़ों से आशीर्वाद मांगना मत, गुरु बड़ों से आशीर्वाद भेंट में लेना। उन्होंने इस दौरान कई बातों के बारे में बताया।

पूजनीय

पिताजी पूजनीय है। उनकी कमाई भी पूजनीय है। उसे पूजनीय ही बनाना चाहते हैं वह तब बनेगी जब इस कमाई को मन्दिर निर्माण में लगा दें। पिता की सेवा ही आज हमारा कर्तव्य है कि हम पिता को सहारा दे उनकी सेवा करें।

स्वतंत्रता

स्वतंत्रता वस्तुत स्वतंत्र जैन दर्शन में एक शब्द आया है लोकमान्य तिलक ने इसी को आधार बनाया। स्वतंत्रता जो अपने मन, इच्छा, अनुभव के अनुसार नहीं चलता वहीं स्वतंत्रता है जो व्यक्ति अपनी मर्जी से जीना चाहता है वह या तो वह पशु पर्याय से आया है या जाने की तैयारी है। तुम अपनी जिंदगी में वह सब कुछ पाना चाहते हो जो तुम्हें पसंद है। वहीं विनाश का कारण है।

वरदान

जब बडे लोग देते हैं तो उसको वरदान कहते हैं। जब छोटे लोग देते है उसे दान कहते हैं। बडे लोग से कभी दान में मत लेना नहीं तो जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। जब छोटे लोग बडे को कुछ देते है उसे दान कहते हैं पिता भी यदि मकान दुकान दान रूप में दें तो उसे मत लेना। राजा से कभी दान नहीं लेना। बड़े लोग दान नही देते हैं वरदान देते हैं।

पूज्य की वस्तु को भोगना 

पूजनीय वस्तुओं को भोगा नही जाता है। पुज्यों की वस्तुओं को पुजनीय बना दो। उसके लिए आपको भोगना नहीं। दुर्भाग्य की बात है बड़े लोग वरदान देते हैं। दान सदा छोटा देता है बड़े लोगों को दिया जाता है आहार दान औषधि दान आवास दान बढ़ो को दिया जाता है। बड़ों से कभी दान नहीं लेना। पिता से भाई राजा से कभी दान मत लेना और हम महाराजों से कोई दान लेना ही मत। चाहे कुछ भी हो महाराज से पेन्सिल मत लेना दान रूप में तो कुछ भी नहीं लेना हम लोग आप से आहारदान लेते हैं।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page