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धर्म जागृति संस्थान ने कुचामन सिटी के संस्कारवान श्रेष्ठियों को बहुमान : सुसंस्कार संवर्धक” एवं “देव शास्त्र गुरु भक्त” सम्मान से विभूषित हुए पदाधिकारी और समाजसेवी


कुचामन सिटी में 15 अगस्त को धर्म जागृति संस्थान द्वारा विशेष सम्मान समारोह हुआ, जिसमें कमल जैन पहाड़िया व संतोष जैन पहाड़िया को “सुसंस्कार संवर्धक” सम्मान मिला। महिला-पुरुष शाखा पदाधिकारियों व रीमा जैन सेठी, किरण जैन झाझरी, बरखा जैन पाटनी को भी सम्मानित किया गया। पढ़िए खास रिपोर्ट….


जयपुर। अखिल भारतवर्षीय धर्म जागृति संस्थान, प्रांत राजस्थान द्वारा कुचामन सिटी में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एक भव्य सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर प्रांतीय अध्यक्ष पदम जैन बिलाला, कार्याध्यक्ष अनिल जैन (आईपीएस), संरक्षक ओमप्रकाश जैन काला एवं कोषाध्यक्ष पंकज जैन लुहाड़िया ने श्री जिनेश्वर दास जैन स्कूल कुचामन सिटी के अध्यक्ष कमल जैन पहाड़िया व मंत्री संतोष जैन पहाड़िया को “सुसंस्कार संवर्धक” सम्मान प्रदान किया।

कार्यक्रम की शुरुआत मंदिर पदाधिकारियों सुभाष जैन, मनोज जैन और अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण से हुई। जैन वीर मंडल कुचामन सिटी ने संस्थान के पदाधिकारियों का स्वागत किया। कोषाध्यक्ष पंकज जैन ने संस्थान के उद्देश्यों और कार्यों की जानकारी दी।

मंत्रित यंत्र” भेंट कर सम्मानित किया 

प्रांतीय अध्यक्ष पदम जैन बिलाला ने कुचामन सिटी से अपने लगाव और संस्कारवान समाज निर्माण पर अपने विचार रखे। इस दौरान श्राविका रीमा जैन सेठी, किरण जैन झाझरी और बरखा जैन पाटनी को “मंत्रित यंत्र” भेंट कर सम्मानित किया गया, जिसमें निर्मला जैन का सहयोग रहा। महिला शाखा अध्यक्षा मेघा जैन पहाड़िया, मंत्री कविता जैन बज और पुरुष शाखा अध्यक्ष सोभाग जैन, मंत्री सुभाष जैन को “देव शास्त्र गुरु भक्त” सम्मान प्रदान किया गया। अनिल जैन (आईपीएस) ने उन्हें पद निर्वहन की शपथ दिलाई।

धर्म प्रभावना में संतों के महत्व पर प्रकाश डाला

मुनि सेवा संघ समिति जयपुर के मंत्री ओमप्रकाश जैन ने साधु-संतों के चातुर्मास की जानकारी देते हुए धर्म प्रभावना में संतों के महत्व पर प्रकाश डाला। सभा में लालचंद जैन, अजीत जैन पहाड़िया, तेज कुमार, कैलाशचंद, सुरेश जैन गंगवाल, अशोक अजमेरा सहित अनेक समाजबंधु उपस्थित रहे और संस्थान की गतिविधियों की सराहना की। समापन पर आचार्य वसुनंदी जी महामुनिराज द्वारा रचित प्रसिद्ध प्राकृत ग्रंथ “अशोक रोहिणी चारित्र” की पाँच प्रतियाँ स्थानीय मंदिरों को स्वाध्याय हेतु भेंट की गईं। सभा का संचालन अशोक जैन ने किया।

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