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धर्म प्रभावना में लीन हैं 104 वर्षीय श्राविका एवं उनकी 5 पीढ़ियां

इंदौर (राजेश पंचोलिया)। पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित श्री महावीर जी में 24 वर्ष बाद होने वाले महामस्तकाभिषेक में प्रमुख सानिध्य के लिए कर्नाटक से राजस्थान आए हैं। सीकर निवासी 104 वर्षीय मोटर देवी उनके दर्शन कर समाधि की स्वीकृति लेना चाहती हैं। मोटर देवी आचार्य श्री शिव सागर जी, श्री धर्म सागर जी, आचार्य श्री अजित सागर जी के समय से ही संघ परम्परा से जुड़ी हैं और आहार भी देती हैं। अब उनकी यह भावना हुई कि उन्हें आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के दर्शन करने हैं तथा उनसे समाधि स्वीकृति लेनी है।

मोटर देवी के पुत्र 80 वर्षीय पंडित धर्म चंद जी शास्त्री भी आचार्य श्री के संंघ में संघस्थ होकर अध्यापन और धार्मिक शिक्षण का कार्य कर रहे हैं। शास्त्री जी के दो पुत्र एवं एक पुत्री तीसरी पीढ़ी के रूप में है। तीसरी पीढ़ी में पुत्र सुकेश हैं। उनकी चौथी पीढ़ी में पुत्रवधू अंकिता पत्नी स्वर्गीय सौरभ जैन हैं तथा पांचवी पीढ़ी में अंकिता का पांच वर्षीय पुत्र तनिष्क है। इसी प्रकार दूसरे वरिष्ठ पुत्र स्वर्गीय शेखरचंद की पत्नी नेमी देवी की उम्र भी 78 वर्ष है। तीसरी पीढ़ी के रूप में उनके भी 4 पुत्र एवं 2 पुत्री है। इनके भी पुत्र चौथी तथा पांचवी पीढ़ी के रूप में हैं। पंडित धर्मचंद जी ने बताया कि उनकी माता जी ने बहुत ही धर्म-ध्यान और हिम्मत से उन सभी को पढ़ा-लिखा कर इस योग्य बनाया क्योंकि जब उनके पिताजी का निधन हुआ, तब उनकी उम्र मात्र 5 वर्ष की थी।

किंतु माताजी ने दोनों पुत्रों और परिवार को बहुत ही हौसले और हिम्मत के साथ उच्च स्तरीय संस्कार दिए हैं। विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि आदरणीय श्री धर्म चंद जी गुरूजी के शिष्य मुनि श्री चिंतन सागर जी, आर्यिका श्री महायश मति जी, आर्यिका श्री देवयश मति जी, आर्यिका श्री देवागम मति जी, आर्यिका श्री संगीत मति जी, आर्यिका श्री सम्पन्न मति जी, नव दीक्षित आर्यिका श्री विश्व यश मति जी, आर्यिका श्री पदमयश मति जी और आर्यिका श्री दिव्य यश मति जी के रूप में धर्म प्रभावना कर रहे हैं।

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