सारांश
श्रावक आदेश्वर पचौरी की वरघोड़ा यात्रा निकालने के बाद रविवार को उनके वैराग्य की अनुमोदना सभा सम्पन्न हुई। उन्होंने संतों से भी आशीर्वाद लिया । पढ़िये अशोक कुमार जेतावत की एक रिपोर्ट..
धरियावद। दीक्षार्थी श्रावक आदेश्वर पचौरी की वरघोड़ा यात्रा निकालने के बाद रविवार को उनके वैराग्य की अनुमोदना सभा सम्पन्न हुई। वरघोड़ा यात्रा में दीक्षार्थी आदेश्वर पचौरी सुसज्जित बग्घी में सवार होकर सुभाष पार्क पुराना बस स्टेण्ड, महावीर स्वामी मन्दिर सदर बाजार, होली चौक, केसरिया जी मन्दिर, नासियां जी मन्दिर, पद्म प्रभु मन्दिर, चन्द्र प्रभु मन्दिर में दर्शन करते हुए चन्द्र प्रभु सभा मण्डप पर पहुंचे। यहां यह यात्रा वैराग्य अनुमोदना सभा में परिवर्तित हो गई, जहां महिला मण्डल की बहनों द्वारा पुष्प के मण्डल सजाकर पुष्प वृष्टि करते हुए उन्हें मंच तक लाया गया।
सभी बहनों ने दीक्षार्थी देशव्रती श्रावक पण्डित आदेश्वर पचौरी के चरण स्पर्श कर आर्शीवाद लिया। सभा को उषा पचौरी, नैना डागरिया, दीपिका पचौरी, ड्रीम पचौरी, ईश्वर पचौरी, करणमल सेठ, विष्णु पालीवाल, मोनिका, राजेश पचौरी, नरेन्द्र पचौरी, मोहित डागरिया, सूर्यप्रकाश बोहरा, दीपा पचौरी ने सम्बोधित किया।

तीव्र पुण्य के उदय से आते हैं दीक्षा के भाव
अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रतिष्ठाचार्य पण्डित हंसमुख जैन ने इस मौके पर कहा कि करोड़ों लोगों में कोई कोई विरला पुरुष जैनेश्वरी दीक्षा धारण करता है। जैनेश्वरी दीक्षा लेने के भाव कई भवों के संस्कार और तीव्र पुण्य के उदय से बनते हैं। आदेश्वर पचौरी 13 फरवरी, 2023 को किशनगढ़ (राज.) में पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि, राष्ट्र गौरव जिनधर्म प्रभावक आचार्य 108 श्री वर्द्धमान सागर महाराज के कर कमलों से जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करने जा रहे हैं ।

परिग्रह सबसे बड़ा दुख का कारण
दीक्षार्थी पंडित आदेश्वर ने इस अवसर पर कहा कि ‘‘ बिना आत्मा के चिंतन से आत्मा को नहीं पहचान सकते हैं और आत्मा का कल्याण भी नहीं कर सकते हैं। परिग्रह सबसे बड़ा दुख का कारण है। मैंने नोटबंदी के समय परिग्रह हटाने के लिए लिखित में व्यापार का त्याग कर दिया था। मैंने स्वाध्याय के माध्यम से सार ग्रहण कर इस वैराग्य मार्ग की ओर अग्रसर होकर चारित्र पद को धारण किया है, आप इसकी प्रार्थना कर अनुमोदना करें जिससे मुझे दृढ़ता प्राप्त हो।
मैंने अपने जीवन के कई वर्ष ऐसे हो व्यतीत कर दिये और अब शरीर दुर्बल हो गया है, तब जाकर जैनेश्वरी दीक्षा के भाव हुए हैं और इस मार्ग पर आगे कदम बढ़ा रहा हूं। कोई बात नहीं शरीर भले ही कमजोर हो गया हो पर मेरा आत्मबल बहुत मजबूत है, मैं इस साधना के मार्ग पर अवश्य आगे बढूंगा।’’

मुनि श्री पूज्य सागर सागर जी महाराज से लिया आशीर्वाद
दीक्षार्थी देशव्रती श्रावक पन्डित आदेश्वर पचौरीरी के घर से (निवास से) बैण्डबाजों के जुलूस के साथ वर घोड़ा (शोभा यात्रा) निकाली गई। धरियावद नगर के सभी श्रावकों और नगरवासियों ने दीक्षार्थी को तिलक लगाकर, फूलमाला पहनाकर, शॉल ओढ़ाकर, श्रीफल लिफाफा भेंटकर स्वागत किया और आशीर्वाद लिया। दीक्षार्थी परिवार द्वारा नगर के सभी पांचों जिनालयों में पोछारा, पूजा उपकरण (रजत के) आदि भेंट कर दर्शन किए गए। उन्होंने श्री महावीर स्वामी जिनालय में आर्यिका 105 श्री प्रसन्न मति माता जी से दर्शन कर आशीर्वाद लिया, साथ ही दिगम्बर जैन नसियां जी मन्दिर में विराजित 108 अन्तर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर सागर जी महाराज से आशीर्वाद लिया।













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