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वर्षायोग में हुई धर्मसभा : त्याग का प्रतीक है धन्य तेरस – मुनि श्री विनतसागर जी


कस्बे में चल रहे पवन वर्षायोग के दौरान श्री पारसनाथ दिगंबर जैन नया मंदिर जी में धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री विनत सागर जी ने कहा कि आज के दिन अंतिम तीर्थंकर वर्धमान शासन नायक महावीर स्वामी ने समवशरण आदि विभूतियों को त्याग कर योग निरोध को धारण किया था। इस त्याग के रूप में यह तेरस धन्य हो गई। पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट…


 

ललितपुर/बानपुर। कस्बे में चल रहे पवन वर्षायोग के दौरान श्री पारसनाथ दिगंबर जैन नया मंदिर जी में धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री विनत सागर जी ने कहा कि आज के दिन अंतिम तीर्थंकर वर्धमान शासन नायक महावीर स्वामी ने समवशरण आदि विभूतियों को त्याग कर योग निरोध को धारण किया था। इस त्याग के रूप में यह तेरस धन्य हो गई। मुनि श्री ने कहा कि धन्य तेरस धन से संबंधित नहीं अपितु त्याग से संबंधित है। महावीर स्वामी ने समवशरण आदि संपत्ति विभूति का त्याग आज के दिन ही किया था। हमने धन्य तेरस को धनतेरस मान लिया है और परिग्रह को जोड़ना प्रारंभ कर दिया।महावीर स्वामी ने त्याग का संदेश दिया और हमने उसे परिग्रह से जोड़ लिया। महावीर स्वामी ने योग निरोध धारण किया। मुनिश्री ने कहा कि अगर जोड़ना ही है तो इंसान से इंसान को जोड़ने का प्रयास करो तथा आपस में प्रेम और वात्सल्य बनाए रखो तो स्वयं लक्ष्मी चलकर तुम्हारे पास आ जाएगी। क्योंकि जहां प्रेम और वात्सल्य होता है, वहीं लक्ष्मी का वास होता है। हम जीवों पर करूणा करें और उनसे वात्सल्य व मैत्री का भाव रखें तो लक्ष्मी स्वयं हम पर करूणा बनाए रखेगी। मुनिश्री ने कहा कि जहां गृह लक्ष्मी स्त्री का सम्मान होता है, वहां धनलक्ष्मी अपने आप आ जाती है। इसलिए हमें अपने घर की लक्ष्मी का सम्मान करना चाहिए। धर्म सभा में जैन समाज के पुरुष एवं महिलाओं सहित बच्चे बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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