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इच्छाओं के गुलाम बन चुके हैं लोग, मन की स्वतंत्रता ही असली स्वराज : देश आज़ाद, पर मन की बेड़ियों में बंधे – मुनि प्रमाण सागर


भोपाल के विद्या प्रमाण गुरुकुलम में स्वतंत्रता दिवस पर मुनि प्रमाण सागर ने कहा कि असली आज़ादी सत्ता नहीं, बल्कि मन और इच्छाओं पर नियंत्रण है। उन्होंने युवाओं को सोशल मीडिया और बुरी आदतों से मुक्त होकर आत्म संयम अपनाने का संदेश दिया। पढ़िए राजीव सिंघई की पूरी रिपोर्ट…


भोपाल (अवधपुरी) स्थित विद्या प्रमाण गुरुकुलम में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय संत मुनि प्रमाण सागर, मुनि संधान सागर और संघ के सानिध्य में ध्वजारोहण एवं राष्ट्रगान का आयोजन हुआ। प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि इस अवसर पर अनेक पदाधिकारी और समाजबंधु उपस्थित रहे। मुनि प्रमाण सागर ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को भारत अंग्रेजों की दासता से मुक्त हुआ, लेकिन आज भी हम अपनी इच्छाओं और बुरी आदतों के गुलाम हैं। उन्होंने कहा कि मन की बेड़ियां तोड़ना सबसे कठिन है, और असली स्वराज वही है जब व्यक्ति अपनी आत्मा और चेतना पर शासन करे।

मुनि श्री ने विशेष रूप से डिजिटल नशे पर चिंता जताई, जिसमें युवा और बुजुर्ग दोनों सोशल मीडिया में डूबे रहते हैं। उन्होंने कहा कि यह समय, ऊर्जा और मानसिक शुद्धता को नष्ट कर रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए एक हाथी की कहानी सुनाई, जो बचपन की रस्सी की आदत के कारण ताकतवर होते हुए भी बंधा रहता है—जैसे लोग अपनी बुरी आदतों के कारण बंधे रहते हैं।

आत्म अनुशासन अपनाने का आग्रह 

उन्होंने युवाओं से भावनात्मक प्रतिक्रियाओं पर नियंत्रण, अपनी गति से लक्ष्य प्राप्ति और आत्म अनुशासन अपनाने का आग्रह किया। मुनि श्री के अनुसार, आध्यात्मिकता से जुड़ने पर व्यक्ति अपने विचारों, इच्छाओं और समय पर नियंत्रण पा सकता है। कार्यक्रम में घोषणा की गई कि 24 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8:30 से 9:30 बजे तक “विचारों पर नियंत्रण” प्रवचन माला और भावनायोग अभ्यास चलेगा। रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 5000 स्वयंसेवकों को विशेष संबोधन और सोमवार को मुनि श्री का मौन उपवास रहेगा।

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