नेमिनगर जैन कॉलोनी में परम पूज्य गणाचार्य विराग सागर जी महा मुनिराज की समाधि मरण होने पर विनयांजलि आयोजित की गई। सभा का संचालन करते हुए समाज मंत्री गिरीश पाटोदी ने गुरुदेव के संस्मरण सुनाते हुए कहा कि 18 फरवरी को विद्या नामक सूर्य का अस्त हुआ और 4 जुलाई को विराग नामक चन्द्र का भी विलय हो गया। पढ़िए यह रिपोर्ट…
इंदौर। नेमिनगर जैन कॉलोनी में परम पूज्य गणाचार्य विराग सागर जी महा मुनिराज की समाधि मरण होने पर विनयांजलि आयोजित की गई। सभा का संचालन करते हुए समाज मंत्री गिरीश पाटोदी ने गुरुदेव के संस्मरण सुनाते हुए कहा कि 18 फरवरी को विद्या नामक सूर्य का अस्त हुआ और 4 जुलाई को विराग नामक चन्द्र का भी विलय हो गया। एक सूर्य थे तो एक चन्द्र, क्योंकि जिस भांति सूर्य अपने प्रकाश से सबको आलौकित करता है, उसी भांति चन्द्र भी अपने प्रकाश से सबको आन्दोलित करता है….
ये कैसा अद्भुत संयोग ??
1. सूर्य का उदय दक्षिण में हुआ तो अस्त उत्तर में और चन्द्र का निलय उत्तर में हुआ तो विलय दक्षिण में हुआ ।
2. दोनों की नाम राशि ‘वि’
3. एक ने अष्टमी को महाप्रयाण किया तो एक ने चतुर्दशी को ! धन्य हैं आप दोनों युगल श्रमण – जिन्होंने अत्यन्त उत्तम समाधि मरण कर इन दोनों शुभ तिथियों को और भी शुभमय कर दिया ।
4. सूर्य रूपी गुरु का अस्त रवि (सूर्य) के दिन रविवार को अस्त हुआ और चन्द्र रूपी गुरु का अस्त गुरु के दिन गुरुवार को अस्त हुआ ।
5. दोनों ही महान आत्माओं का समाधि मरण रात्रि के 2.30 बजे जे हुआ।
विनयांजलि सभा में कई वक्ताओं ने अपने संस्मरण सुनाए। प्रवीण पाटनी, इन्द्र कुमार सेठी ने गुरुदेव के नेमिनगर प्रवास के वक्त के कई संस्मरण बताये। प्रतिभा अजमेरा, सुनीता पाटनी, मनी अजमेरा, उर्मिला दोषी, रश्मि गांधी, मधु जैन, निर्मला पाटोदी तथा कौशल्या पतंगिया जी ने गुरुदेव के वात्सल्य को विस्तार से बताया।
समाज अध्यक्ष कैलाश लुहाड़िया गुरुदेव के प्रवचन शैली तथा नेमिनगर प्रवास के दौरान आहार आदि की बातें बतायी और कहा कि गुरुदेव जहां भी जाते वहां समवशरण लग जाया करता था। करीब 84 पिच्छी जैन कॉलोनी में विराजित हुई थी। सुदर्शन जटाले, राजेश बज, राजेंद्र जैन, बांझल, सिद्धार्थ नगर, ज्योति जैन, मनाली भूता, प्रमोदिनी जैन, निर्मला जैन, डा संगीता जैन, श्रीमती टोंगिया, सुनीता अजय जैन, कुसुम गंगवाल, ज्योति कोशल जैन, उषा कासलीवाल, शशि बहन, शिरोमणि पाटनी, श्रीमती पहाड़िया, हीरामणि पाटनी, सनत गंगवाल, संदीप गंगवाल, मंजु गुना, कृष्णा टोंगिया, आदि समाज जन उपस्थित थे। अंत में शांति पाठ किया गया।













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