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गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी कर करकमलों हुआ विमोचन : डॉ. अनुपम जैन द्वारा रचित “जैन गणित” ग्रंथ का समर्पण


भारत सरकार – शिक्षा मंत्रालय द्वारा देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर में भारतीय ज्ञान परम्परा जैन गणित केन्द्र (IKS Centre in Jaina Mathematics) की स्थापना कर प्रसिद्ध जैन गणितज्ञ प्रो. अनुपम जैन को केन्द्र के मुख्य अन्वेषक के रूप में जैन गणित पर एक सन्दर्भ ग्रंथ के सृजन का दायित्व दिया गया था। प्रो. जैन ने अपने सुदीर्घ अनुभव के आधार पर निर्धारित समयावधि में इस कृति का सृजन कर इसकी डिजिटल प्रति तैयार कर दी। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


अयोध्या। भारत सरकार – शिक्षा मंत्रालय द्वारा देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर में भारतीय ज्ञान परम्परा जैन गणित केन्द्र (IKS Centre in Jaina Mathematics) की स्थापना कर प्रसिद्ध जैन गणितज्ञ प्रो. अनुपम जैन को केन्द्र के मुख्य अन्वेषक के रूप में जैन गणित पर एक सन्दर्भ ग्रंथ के सृजन का दायित्व दिया गया था। प्रो. जैन ने अपने सुदीर्घ अनुभव के आधार पर निर्धारित समयावधि में इस कृति का सृजन कर इसकी डिजिटल प्रति तैयार कर दी । श्रुत पंचमी के पावन पर्व पर 31.05.25 को जैन गणित की उद्भव भूमि अयोध्या में गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माता जी ससंघ के पावन सान्निध्य में जिनवाणी – सरस्वती के पुनीत चरणों में इसकी प्रति समर्पित की। पश्चात् इसकी एक प्रति गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माता जी के कर कमलों में भी समर्पित की। इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर के कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई ने ग्रंथ की प्रति औपचारिक रूप से भारत सरकार के भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय समन्वयक प्रो. जी. एस. मूर्ति को समर्पित की।

प्रो. मूर्ति ने ग्रंथ स्वीकार करते हुए कहा कि 2-3 वर्ष पूर्व हमने पूरे देश में 22 केन्द्रों की स्थापना की थी उसमें से गणित का मात्र एक केन्द्र था एवं मुझे यह कहते हुए प्रसन्नता है कि देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर में स्थापित इस जैन गणित केन्द्र ने सर्वश्रेष्ठ कार्य किया है। फलतः हमने भी यह केन्द्र आगामी 2 वर्ष (2027) तक बढ़ा दिया है। जैन गणित भारतीय गणित की एक प्रमुख शाखा है एवं हम आश्वस्त है कि प्रो. जैन के नेतृत्व में यह केन्द्र अच्छी उपलब्धियाँ अर्जित करता रहेगा।

आज समर्पित किया गया यह ग्रंथ अत्यंत विशाल एवं महत्त्वपूर्ण है। हम कतिपय विधिक औपचारिकताओं की पूर्ति के उपरान्त इसे IKS Div. की ओर से E-Book के रूप में प्रकाशित करेंगे तथा प्रयास करेंगे कि इसका लोकार्पण माननीय शिक्षा मंत्री- भारत सरकार के कर कमलों से निकट भविष्य में भव्य शिक्षा समागम में नई दिल्ली में किया जाये।

विश्वविद्यालय के माननीय कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई जी ने कहा कि अनुपम जी ने इस ग्रंथ का सृजन कर जैन साहित्य ही नहीं भारतीय गणित की भी अनुपम सेवा की है। इस कार्य हेतु उनका भी सम्मान किया जाना चाहिए क्योंकि यह अनुपम कार्य उन्होंने किया है।

विश्वविद्यालय इस केन्द्र के सतत् निर्बाध संचालन में पूर्ववत् पूर्ण सहयोग प्रदान करता रहेगा ।

डॉ. अनुपम जैन ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरुजनों के आशीर्वाद एवं मित्रों की शुभकामनाओं से 45 वर्ष पूर्व मन में लिए एक संकल्प की पूर्ति हो रही है ।

पूज्य ज्ञानमती माताजी ने अपने आशीर्वाद में कहा कि यह जैन गणित की उद्भव भूमि है क्योंकि यहीं पर भगवान ऋषभदेव ने अपनी पुत्री सुन्दरी को अंक विद्या की शिक्षा दी थी । अतः यह गणित की

उद्भव भूमि है। मेरे शिष्य अनुपम ने जैन गणित पर यह विशाल 712 पृष्ठीय ग्रंथ लिखकर जैन साहित्य की महती सेवा की है उसे मेरा बहुत – बहुत आशीर्वाद है।

वह तो मेरे पास बाल्यकाल से है। उसने ग्रंथ लिख दिया अब पढ़ना आप सबको है । हम भी पढ़ेगे । मैंने चन्दनामती माता जी को कह दिया है कि इसका सारांश पढ़ पढ़ कर बताती रहे । कथंचित हम तो चिन्तन करेंगे।

प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चन्दनामती जी ने कहा कि विद्वत् महासंघ के यशस्वी अध्यक्ष डॉ. अनुपम जैन के जैन गणित ग्रंथ को देखकर अच्छा लगा। 712 पृष्ठों के इस ग्रंथ को 2 वर्ष में प्रस्तुत किया गया है किन्तु इसकी साम्रगी के संकलन में 40-45 वर्ष लगे । अनुपम जी अपने विद्यार्थी जीवन 1981 से ही इस काम में लगे हुए है वे पूज्य माताजी को अपना धर्मगुरु मानते है । अतः आज इस कृति को जैन गणित की उद्गम भूमि में सरस्वती स्वरूपा में ज्ञानमती को समर्पित करने आये है, उनको एवं निशा जी को मेरा आशीर्वाद ।

डॉ. अनुपम जैन के परिवार की ओर से श्री अनुज जैन ने माननीय कुलपति जी, प्रो. मूर्ति एवं समागत समस्त विद्वानों का आभार माना। कार्यक्रम में Emory University, Atlanta (U. S.A.) की जैनोलोजी की प्रोफेसर Ellen Gough विशेष रूप से उपस्थित थी। पूज्य माताजी एवं संघ की वन्दना के साथ सभा विसर्जित की गई।

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