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जैन संत की हत्या के विरोध में दिया जाएगा ज्ञापन : अपने शरीर को नहीं, अपनी आत्मा को रत्नत्रय से सजाएं- आचार्य विहर्षसागर जी


हमारी आत्मा से अनंत भव के छह कर्म चिपके हुए हैं। जब तक उन कर्मों का क्षय नहीं होगा, तब तक आत्मा निर्विकार और शुद्ध नहीं होगी। यह उद्गार राष्ट्रसंत आचार्य विहर्ष सागर जी महाराज ने गुरुवार को मोदी जी की नसियां बड़ा गणपति पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। पढ़िए राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट…


इंदौर। सौंदर्य प्रसाधनों के उपयोग से लोग अपने शरीर को सजाने-सुंदर बनाने में लगे रहते हैं, जबकि आवश्यकता शरीर को नहीं बल्कि अपनी आत्मा को सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र इन तीन रत्नों से सजाने की है। हमारी आत्मा से अनंत भव के छह कर्म चिपके हुए हैं। जब तक उन कर्मों का क्षय नहीं होगा, तब तक आत्मा निर्विकार और शुद्ध नहीं होगी। यह उद्गार राष्ट्रसंत आचार्य विहर्ष सागर जी महाराज ने गुरुवार को मोदी जी की नसियां बड़ा गणपति पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। आचार्य श्री ने इन छह कर्मों से क्षय के लिए श्रावक को प्रतिदिन देव दर्शन, पूजा भक्ति, स्वाध्याय और जिनवाणी का श्रवण करना चाहिए। जीव का कल्याण भगवान का नाम जपने से नहीं, उनके गुणों को ग्रहण करने से होगा। इसलिए भगवान से प्रीति रखते हुए उनके गुणों को ग्रहण करो। आचार्य श्री ने कर्नाटक में हाल ही में हुई जैन मुनि की जघन्य हत्या की निंदा करते हुए समाज का आह्वान किया कि आजकल संतों पर प्रहार और हमारे तीर्थों पर अतिक्रमण की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं, जो हमारी संस्कृति और हमारे धर्म के लिए घातक एवं चिंताजनक है।

संगठित रहे जैन समुदाय

आचार्य श्री ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं इसलिए घट रही हैं कि समाज ना तो जागरूक है, ना संगठित है। साधुओं में भी एकता नहीं है। सभी पंथवाद ,संतवाद और ग्रंथवाद से ग्रसित हैं और यही कारण है कि आज हमारी संस्कृति, धर्म, संत और हमारे तीर्थ सुरक्षित नहीं हैं। इस तरह की घटनाओं पुनरावृत्ति ना हो, इसके लिए आवश्यक है कि दिगंबर एवं श्वेतांबर समुदाय परस्पर में संगठित एवं वात्सल्य से रहें। पंथवाद, ग्रंथवाद और अपने अहं का त्याग कर दुनिया के समाज एकता का परिचय दें। तभी हमारा धर्म, संस्कृति, समाज एवं तीर्थ और परिवार सुरक्षित रह पाएंगे। प्रारंभ में मुनि श्री विजयेशसागर जी महाराज ने भी धर्म सभा को संबोधित किया। प्रारंभ में मंगलाचरण पंडित रमेश चंद बांझल ने किया,आचार्य विराग सागर जी के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलन राजेंद्र सोनी, डॉक्टर जैनेंद्र जैन, पारस पांड्या एवं पीयूष जैन ने किया। आचार्य श्री को योगेंद्र काला योगेश जैन, सुनील गोधा ने

श्रीफल समर्पण कर आशीर्वाद प्राप्त किया। धर्म सभा का संचालन कमल काला ने किया।

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Shreephal Jain News

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