दशलक्षण पर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म मनाया गया, धूप दशमी का भी अनुष्ठान हुआ। प्रातःकालीन बेला में भगवान का अभिषेक व शांतिधारा की गई, इस मौके पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए आर्यिका रत्न धारणामति माताजी ने कहा कि संयम धर्म इंद्रिय को वश में रखना ही इंद्रिय संयम है। स्पर्श, रसना, घ्राण, चक्षु और कर्ण ये पांच इंद्रियां हैं, इन इंद्रियों के विषयों में आसक्त हुआ यह कि मोही प्राणी अपने स्वभाव को भूल रहा है, अपनी ही अज्ञानता का परिणाम है कि सामर्थ्य शक्तिवान होते हुए भी इनका दास बना हुआ है। पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट…
महरौनी (ललितपुर)। दशलक्षण पर्व के छठे दिन उत्तम संयम धर्म मनाया गया, धूप दशमी का भी अनुष्ठान हुआ। प्रातःकालीन बेला में भगवान का अभिषेक व शांतिधारा की गई, इस मौके पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए आर्यिका रत्न धारणामति माताजी ने कहा कि संयम धर्म इंद्रिय को वश में रखना ही इंद्रिय संयम है। स्पर्श, रसना, घ्राण, चक्षु और कर्ण ये पांच इंद्रियां हैं, इन इंद्रियों के विषयों में आसक्त हुआ यह कि मोही प्राणी अपने स्वभाव को भूल रहा है, अपनी ही अज्ञानता का परिणाम है कि सामर्थ्य शक्तिवान होते हुए भी इनका दास बना हुआ है।
सांध्यकालीन बेला में भगवान जिनेन्द्र की संगीतमय आरती की गयी, तत्पश्चात श्री विद्यासागर पाठशाला के तत्वावधान में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका शुभारंभ नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि दुष्यंत बडौनिया ने किया। दिगम्बर जैन पंचायत द्वारा नगर पंचायत प्रतिनिधि का माल्यार्पण कर शॉल और श्रीफल भेंट कर स्वागत किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत भगवान नेमीनाथ की बारात और जंगल गमन नाट्य प्रस्तुति की गयी।पात्रों द्वारा अभिनय कर सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सकल दिगम्बर जैन समाज का सहयोग रहा ।वहीं दशलक्षण महापर्व श्री यशोदय तीर्थ,श्री शांतिनाथ जिनालय एवं श्री चंद्रप्रभु जिनालय में भी धार्मिक कार्यक्रमों की धूम रही।













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