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संस्कृति और संस्कार प्रथम: स्याद्वाद युवा क्लब ने त्रिलोकतीर्थ में किया 500वां अभिषेक 


हमें कभी भी अपनी संस्कृति और संस्कारों को नहीं भूलना चाहिए । पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री विद्याभूषण सन्मतिसागर जी महाराज ने स्याद्वाद के माध्यम से जिन संस्कारों का बीजारोपड़ युवा साथियों में किया था वह आज दिखाई दे रहा है । पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट मनोज नायक की श्रीफल जैन न्यूज़ के साथ…


बड़ागांव! हमें कभी भी अपनी संस्कृति और संस्कारों को नहीं भूलना चाहिए । आधुनिकता की चकाचौंध में हमें अपनी संस्कृति, सभ्यता व संस्कारों को दरकिनार नहीं करना चाहिए। आज के समय में हम शिष्टाचार, नैतिकता को भूलते जा रहे हैं। शिष्टाचार व नैतिकता हमारे जीवन में बहुत अहम चीजें हैं। किसी भी विषय को ले लें, हम अपनी युवा पीढ़ी पर पूरा दोष डाल कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। सवाल यह नहीं कि आज की युवा पीढ़ी में नैतिकता व शिष्टाचार की कमी हो रही है। सवाल यह भी है कि क्या सिर्फ युवा पीढ़ी पर दोषारोपण से हमारी जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है। पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री विद्याभूषण सन्मतिसागर जी महाराज ने स्याद्वाद के माध्यम से जिन संस्कारों का बीजारोपड़ युवा साथियों में किया था वह आज दिखाई दे रहा है । उक्त विचार मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक श्री पवन जैन भोपाल ने स्याद्वाद युवा क्लब के 500वें साप्ताहिक अभिषेक कार्यक्रम के पश्चात व्यक्त किए ।

आचार्य श्री विद्याभूषण सन्मतिसागर जी महाराज की दूरगामी सोच

पुलिस महानिदेशक पवन जैन भोपाल ने बताया कि 23 जुलाई, रविवार को मुझे स्याद्वाद युवा क्लब द्वारा त्रिलोक तीर्थ धाम, बड़ागांव में आयोजित 500वें साप्ताहिक अभिषेक में श्रीजी के अभिषेक-शांतिधारा का सौभाग्य मिला । आचार्य श्री विद्याभूषण सन्मतिसागर जी महाराज की दूरगामी सोच ‘स्याद्वाद युवा क्लब’ के रुप में आज की युवा पीढ़ी को अपने धर्म से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।

आधुनिकता की चकाचौंध में अपनी संस्कृति को न करें दरकिनार

पवन जैन ने बताया क्या हम युवा पीढ़ी के लिए अपना कर्तव्य निष्ठा से निभा रहे हैं। क्या सारी गलती युवा पीढ़ी की ही है। मुझे नहीं लगता कि आज की युवा पीढ़ी सौ प्रतिशत गलत है। आज उनमें संस्कारों की कमी अगर हो रही है तो उसकी वजह सिर्फ और सिर्फ हम ही हैं। क्यों हम उनमें संस्कार नैतिकता शिष्टाचार नहीं भर पा रहे हैं। यह एक सोचने का विषय है। बच्चों का अनैतिक होना हमारी कमजोरी है।

अत्यंत गर्व की बात है कि हमारी जैन समाज में ऐसे युवा संगठन भी हैं जो इस भागम-भाग की जिंदगी में अपने धार्मिक संकल्पों के साथ आगे बढ़कर कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। स्याद्वाद युवा क्लब समाज की एक ऐसी संस्था है जिसने जिनेंद्र प्रभु के अभिषेक-पूजन की प्रतिज्ञा की है और ऐसे दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ते-बढ़ते 100वें, 200वें और अब 500वें अभिषेक तक पहुंच गए हैं।

त्रिलोकतीर्थ धाम

उत्तर प्रदेश के बागपत जिलाअंतर्गत अतिशय क्षेत्र बड़ागांव में आचार्य श्री विद्याभूषण सन्मतिसागर महाराज की प्रेरणा एवम आशीर्वाद से निर्मित त्रिलोकतीर्थ धाम में जमीन से 317 फ़ीट की ऊँचाई पर विराजित विश्ववंदनीय भगवान श्री आदिनाथ की अष्ट धातु की प्रतिमा पूरे देश की सबसे ऊँची पद्मासन की प्रतिमा है। राजाखेड़ा और चंबल अंचल के सैकड़ों युवा क्लब के अध्यक्ष शैलेश जैन, सुदीप जैन, अजय जैन और रुपेश जैन के नेतृत्व में धर्म, अध्यात्म एवं मानव सेवा का नया अध्याय लिख रहे हैं। सभी को मेरी ओर से ढेर सारी शुभकामनाएं। आप सब ऐसे ही धर्म के पथ पर आगे बढ़ते रहें। साथ ही अधिक से अधिक लोगों को भी जोड़ते रहें।

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