यदि गृहस्थ जीवन में रहकर मनुष्य अपने पापों का नाश करना चाहता है और अपने पुण्य का संचय करना चाहता है एवं मनुष्य पर्याय को सार्थक करना चाहता है । लेकिन वह त्याग...
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हमें कभी भी अपनी संस्कृति और संस्कारों को नहीं भूलना चाहिए । पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री विद्याभूषण सन्मतिसागर जी महाराज ने स्याद्वाद के माध्यम से जिन संस्कारों...








