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धार्मिक कार्यक्रमों के साथ छाया हर्षोल्लास : भगवान पार्श्वनाथ और चंद्र प्रभु का तप और जन्मकल्याणक मनाया      


जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का 2900वां एवं चंदा प्रभु भगवान का जन्म एवं तप कल्याणक नगर में विराजमान मुनि श्री प्रयोग सागर जी महाराज, मुनि श्री प्रबोध सागर जी महाराज के सानिध्य में श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में बहुत ही भक्ति भाव एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। पढ़िए सन्मति जैन काका की रिपोर्ट…


सनावद। जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का 2900वां एवं चंदा प्रभु भगवान का जन्म एवं तप कल्याणक नगर में विराजमान मुनि श्री प्रयोग सागर जी महाराज, मुनि श्री प्रबोध सागर जी महाराज के सानिध्य में श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में बहुत ही भक्ति भाव एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। दोनों मुनिराजों के सानिध्य में रत्नों से निर्मित भगवान पार्श्वनाथ मंडल विधान की रचना कर अर्घ्य समर्पित किए गए। इस अवसर पर प्रातः श्रीजी का अभिषेक कर शांति धारा की गई। मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान की शांतिधारा करने का अवसर सुधीर कुमार प्रशांत चौधरी परिवार एवं सुधीर कुमार श्रीचंद परिवार को प्राप्त हुआ।

भक्ति होती है अतिशयकारी

इस अवसर पर मुनि श्री प्रबोध सागर जी ने कहा की भक्ति अतिशयकारी होती है। भक्ति जब अतिशय का रूप ले लेती है तो वो तो परिणामों की शुद्धि में हितकर होती है। भक्ति जब की जाती है तो वो अनंत गुना फल देने वाली होती है। आज हम भगवान पार्श्वनाथ का जन्म और तप कल्याणक मना रहे हैं। जन्म सार्थक हो, तप धारण करें, इन भावनाओ के साथ भक्ति का अभिलेख है।

श्रद्धा और भक्ति से प्राप्त होता है सब कुछ

वहीं मुनिश्री प्रयोग सागर जी महाराज ने अपने उद्बबोधन में कहा कि प्रभु के श्री चरणों के प्रति श्रद्धा और भक्ति के माध्यम से बहुत कुछ प्राप्त होता है। जब भगवान पार्श्वनाथ अपने से लगें, अच्छे से लगें यानी जिस दिन से प्रभु अपने से लगने लगें तो समझ लेना उस दिन जीवन में धर्म की शुरुआत हो गई है।

इन्हें प्राप्त हुआ सौभाग्य 

इस पावन अवसर पर सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य नकुल लोकेंद्र कुमार जैन को प्राप्त हुआ, वही कुबेर इंद्र बनने का सौभाग्य अनुभव कुमार, इंदरचंद सराफ को प्राप्त हुआ। ईशान इंद्र बनने का सौभाग्य तपन कुमार जैन व यज्ञ नायक बनने का सौभाग्य अभिजीत कुमार सराफ को प्राप्त हुआ। इसके साथ ही 23 परिवारों को भी इंद्र बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मंडल विधान में साठ अर्घ्य समर्पित करने का सौभाग्य साठ परिवारों को भी प्राप्त हुआ। इस पावन अवसर पर संपूर्ण विधान के सामग्री प्रदाता बनने का सौभाग्य रागिनी राजेश जैन एवं सारिका राकेश जैन जीरभार परिवार को प्राप्त हुआ। मुनिश्री प्रयोग सागर जी महाराज को आहार दान का सौभाग्य डॉ.यतीश कांतिलाल जैन परिवार को एवं मुनि श्री प्रबोध सागर जी महाराज को आहार दान का सौभाग्य रेखा राकेश जैन मेडिकल परिवार को प्राप्त हुआ। शाम को बड़ा मंदिर जी में कमल जैन एंड पार्टी बड़वाह ने अपने सुमधुर भजनों से आरती कर संपूर्ण कार्यक्रम में समा बांध कर सभी को भक्ति करने पर बाध्य कर दिया।

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