देश के प्रमुख सांस्कृतिक पर्व दीपावली पर जब वीर प्रभु महावीरस्वामी का निर्वाण कल्याणक व गौतम स्वामी का केवलज्ञान कल्याणक पर बच्चों को जीवदया का महत्व समझाते हुए स्थापना नहीं फोड़ने का संकल्प लिया गया था। इन बच्चों को छोड़ दिया गया। यह रिपोर्ट पढ़ें…
थांदला। जीवदया के संस्कार जैन दर्शन के प्राण हैं, जो परम्परागत तरीके से जैन धार्मिक मठ व समय-समय पर होने वाले धार्मिक-सांस्कृतिक व पारपार्थिक उत्सव को जीव दया से युक्त दीक्षा की प्रेरणा गुरुभगवन्तों व स्थानीय संप्रदाय द्वारा दी जाती है। ऐसे ही देश के प्रमुख सांस्कृतिक पर्व दीपावली पर जब वीर प्रभु महावीरस्वामी का निर्वाण कल्याणक एवं गौतम स्वामी का एकमात्र ज्ञान कल्याणक पर बच्चों को जीवदया का महत्वपूर्ण अर्थ समझाते हुए टूटे नहीं फोड़ने का संकल्प लिया। क्वीना चोपड़ा में तोशानी चोपड़ा समेत 15 से ज्यादा बच्चों ने दिवाली पर जीवदया धर्म अपनाते ऐसे बोल्ट नहीं फोड़ने का संकल्प लिया।
अखिल भारतीय एवं श्री राजेंद्र जैन नवयुवक महिला परिषद द्वारा बच्चों का सम्मान कर उन्हें पुरस्कृत किया गया। सभी बच्चों को राष्ट्रीय कार्यालय से उपहार भी दिए गए। इस अवसर पर परिषद के वरिष्ठ मोटौल पीचा, रमनलाल मुथा, तेजेश कटारिया महिला परिषद के क्षेत्रीय सदस्य पूर्णिमा मुथा, प्रतिभा लोढ़ा आदि ने संस्कारित बच्चों की प्रशंसा करते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।













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