समाचार

श्री वासुपूज्य भगवान का गर्भ कल्याण मनाया: मुनिश्री शुद्धसागर जी ने कराई वृहद शांतिधारा 


नगर में प्रवासरत आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी महाराज के शिष्य मुनिश्री शुद्ध सागरजी महाराज के सानिध्य में प्रवचन के पूर्व मंगलवार को पारसनाथ जिनालय में 1008 श्री वासुपूज्य भगवान के गर्भ कल्याणक पर्व पर विशेष शांतिधारा की गई। सभा में जैन समाज डडूका, जैन युवा समिति डडूका, दिगंबर जैन पाठशाला डडूका तथा प्रभावना महिला मंडल डडूका की बहनों ने हिस्सा लिया। डडूका से पढ़िए, यह खबर…


डडूका। नगर में प्रवासरत आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी महाराज के शिष्य मुनिश्री शुद्ध सागरजी महाराज के सानिध्य में प्रवचन के पूर्व मंगलवार को पारसनाथ जिनालय में 1008 श्री वासुपूज्यनाथ भगवान के गर्भ कल्याणक पर्व पर विशेष शांतिधारा की गई। सभा में जैन समाज डडूका, जैन युवा समिति डडूका, दिगंबर जैन पाठशाला डडूका तथा प्रभावना महिला मंडल डडूका की बहनों ने हिस्सा लिया। मुनि श्री शुद्ध सागरजी महाराज के प्रतिदिन के प्रवचन शुद्ध जिनवाणी नाम से यूट्यूब चैनल पर भी उपलब्ध हैं। मुनिश्री शुद्धसागर जी ने मंगलवार को प्रातः कालीन प्रवचन में श्रावक-श्राविकाओं को सुखी होने के उपाय बताते हुए कहा कि जब तक आप सुखी होने के लिए आराम देने वाले संसाधनों को जुटाने में लगे रहोगे तब तक कभी सुखी नहीं हो सकते हो।

संसार का हर प्राणी सुखी होने की आकांक्षा रखता है पर वह समस्त साधन जोड़कर सुख पाने का प्रयास करता है और इसी कारण सुखी होने के बजाय दुःखी होता रहता है। जब आपका सुखी होने का उपाय ही झूठा है। फिर आप सुखी कैसे हो सकते हैं। जब दर्द पेट में हो रहा है और दवा बुखार की लोगे तो आपको राहत कहा से मिलेगी। संसार में सम्यक दृष्टि को छोड़ सभी मिथ्या दृष्टि लोग उस सुख को पाने के बेकार प्रयास करते है जिनसे सुख नहीं मिलना। मुनिश्री ने कहा कि इच्छाओं पर नियंत्रण कर सब कुछ ईश्वर के भरोसे ही छोड़कर ही सुखी बना जा सकता है।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
0
+1
0
Shreephal Jain News

About the author

Shreephal Jain News

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page