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पावागिरी ऊन में पंच कल्याणक महोत्सव में जन्म कल्याणक मनाया: आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी ने कहा कि नवीनता ही आनंद है


पावागिरी जी में चल रहे विश्व शांति एवं पंच कल्याणक महोत्सव पर बुधवार को भगवान तीर्थंकर बालक का जन्म हुआ। जिसको देख कर उपस्थित जन समुदाय और ंतीर्थंकर बालक के माता पिता, सौधर्म इंद्र, शची इंद्राणी, कुबेर और सभी इंद्र इंद्राणी ने अपार उत्साह और उल्लास पूर्वक खुशी नाच गाकर की। गुरुवार को दीक्षाएं होंगी। ऊन खरगोन से दीपक प्रधान की यह खबर पढ़िए…


ऊन (खरगोन)। दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र पावागिरी जी में चल रहे विश्व शांति एवं पंच कल्याणक महोत्सव पर बुधवार को भगवान तीर्थंकर बालक का जन्म हुआ। जिसको देख कर उपस्थित जन समुदाय और तीर्थंकर बालक के माता पिता, सौधर्म इंद्र, शची इंद्राणी, कुबेर और सभी इंद्र इंद्राणी ने अपार उत्साह और उल्लास पूर्वक खुशी नाच गाकर की। कुबेर ने रत्नों की वृष्टि की। प्रातः आचार्य संघ तलहटी मंदिर के दर्शन कर बैंडबाजों के साथ मंचासीन हुए। आर्यिका विशिष्टमति जी माताजी ने धर्मसभा को संबोधित किया और आचार्य श्री विराग सागर जी को याद करते हुए भाव विह्वल हो गईं। होने वाले आचार्य के पट्टशिष्य आचार्य श्री से निवेदन किया कि हमें और हमारे पूरे संघ को अब आप ही संभालना। आप ही सिखाना। अब आप ही हमारे गुरु, हमारे पिता ,हमारी माता आप ही हैं। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने कहा कि मुनि राज क्यों मुस्कुराते हैं ? आचार्य श्री ने बताया के मुनि इस लिए मुस्कुराते है कि वो रोज नवीनता लिए होते हैं। रोज नया प्राप्त करते है मुनिराज को रोज नया घर, नया मोहल्ला, नया नगर, नया श्रावक मिलता है जो कि आहार, निहार, विहार करवाता है। अतः नवीनता ही आनंद है। पुराना उनको देखना अच्छा नहीं लगता जो नवीन को देखना ही नहीं चाहते। नया तो नया ही है।

सब्जी, दाल नहीं तो पानी से ही रोटी खा लेना

मुनि श्री ने आगे कहा कि आपको अपने जीवन में भोजन में भी रोटी अवश्य खाना ही चाहिए और साधु को तो कम से कम छः रोटी खाना चाहिए। सब्जी, दाल नहीं तो पानी से ही रोटी खा लेना। यदि आप फलों और रसों पर रहोगे तो गोली खाना ही पड़ेगी। आपको बल भोजन से ही मिलेगा और रोटी का अभिप्राय समझिए भोजन सिर्फ बल देता है और आप आत्मा के आश्रित वीर हो ,और यदि वीर नहीं हो तो बल कुछ नहीं कर सकता ,जिन शासन के श्रावक को अपने जिन शासन के मौसम का त्याग नहीं करना चाहिए ।आप में यदि उत्साह शक्ति नहीं है तो हम भगवान केसे बन सकते है ,आगे बताया कि इस पंच कल्याणक कार्यक्रम को प्रतिष्ठाचार्य सम्पन्न कराता है और कब किस वस्तु की आवश्यकता है वो प्रतिष्ठाचार्य ही व्यवस्था करवाता है अतः प्रतिष्ठाचार्य को समीकदृष्टि होना चाहिए इस कार्यक्रम में नमक की डली से लेकर सांप की बामी की मिट्टी अन्य मिट्टी वनस्पति, औषधि आदि लगती है। याने किसी भी चीज का अभिप्राय आने से वस्तु बदल जाती है जैसे खेत की मिट्टी को देख कर कुंभकार, किसान,वैद्य,हाकिम, व्यापारी की दृष्टि बदल जाती है।

विधायक ने श्रीफल किया भेंट 

ट्रस्ट के प्रचार मंत्री आशीष जैन एवं मनीष दोषी ने बताया कि आज आचार्य के दर्शनार्थ पंधाना विधायक छाया मोरे और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तोताराम महाजन ने श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया। ट्रस्ट कमेटी ने अतिथियों का सम्मान किया। आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन अर्पित अशोक कासलीवाल ने किया जबकि जन्मभिषेक का प्रथम अभिषेक हेमचंद झंझरी इंदौर ने किया। पश्चात सौधर्म इंद्र शची इंद्राणी अशोक चंदा झांझरी और अन्य इंद्र कुबेर और श्रावक श्राविकाओं ने तीर्थंकर बालक के जन्म कल्याणक पर विशाल शोभा यात्रा निकाली जो कि पांडुक शीला पर तीर्थंकर बालक के जन्माभिषेक किए और खूब आनंद भक्ति उल्लास के साथ नृत्य कर के चल रहे थे। मुनि संघ की आहार चर्या के बाद दोपहर को बाल क्रीड़ा, दीक्षार्थी की मेंहदी, गोद भराई हुई, तीर्थंकर बालक को पालने में झुलाने का कार्यक्रम आरती हुई।

दो दीक्षाएं संपन्न होगी

गणिनी आर्यिका विशिष्ट मति माताजी एवं आचार्य श्री के सानिध्य में जयश्री दीदी छतरपुर एवं क्षुल्लिका विपथ श्री माताजी की दीक्षा संस्कार विधि दोपहर 1 बजे से प्रारंभ होगी। सुबह केशलोच क्रिया होगी। गुरुवार को दीक्षा कल्याण के अंतर्गत सुबह अन्नप्राशन विधि, तीर्थंकर बाल क्रीड़ा, दोपहर में विवाह ,राज दरबार 32 मुकुटबद्ध राजाओं द्वारा भेंट, राज्याभिषेक, नीलांजना का नृत्य वैराग्य एवं दीक्षा कल्याणक की समस्त क्रियाएं होंगी।

दीक्षार्थीयो का परिचय

1- पंचकल्याणक महोत्सव के अंतर्गत पावागिरी ऊन के इतिहास में पहली बार महावीर जयंती के दिन हो रही भव्य जैनेश्वरी दीक्षा ले रही दीक्षार्थी जयश्री दीदी का अदभुत संयोग है कि उनका जन्म 60 वर्ष पूर्व महावीर जयंती के दिन हुआ था और महावीर स्वामी के दरबार में महावीर जयंती के दिन ही जैनेश्वरी आर्यिका दीक्षा होने जा रही है। संपन्न परिवार से संबंध रखने वाली दीदी का भरा पूरा परिवार है। तीन बच्चों की मां होने के बाद अपने गृहस्थ परिवार का पालन करने के बाद संसार की असारता को देखते हुए 2014 में आचार्य विराग सागर जी से व्रत प्रतिमा के नियम ले लिए। तब ही से निरंतर वैराग्य पथ पर अग्रसर होती जा रही हैं। विशेष बात यह है कि जयश्री दीदी तीन बार भाजपा की जिला महामंत्री पद पर रह चुकी हैं। साथ ही नगर पालिका छतरपुर की पार्षद रहने के साथ ही खजुराहो जैन समाज की मंत्री भी रह चुकी हैं। इतने सब पदों पर रहकर भी भरा पूरा परिवार छोड़कर दीक्षा की राह अपना रही हैं।

2- दूसरी दीक्षार्थी क्षुल्लिका विपथ श्री माताजी का गृहस्थ नाम पुष्पा जैन था। यह बृजपुर जिला पन्ना की रहने वाली हैं। मात्र 5 वीं तक शिक्षा प्राप्त क्षुल्लिका के पति भी संघ में क्षुल्लक विश्वतीर्ण सागरजी के नाम से साधनारत हैं।सात भाई बहन एवं दो पुत्रों को छोड़कर 2013 में विराग सागर जी से वीरागोदय क्षेत्र में क्षुल्लिका दीक्षा 13 फरवरी को हुई थी, ऐसी दीक्षार्थी को क्षुल्लिका से आर्यिका दीक्षा प्रदान की जाएगी।

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