सफलता की राह पर चलते हुए अपने मन में घमंड व अहंकार पनपने न दें। अहंकार पतन का रास्ता तैयार करता है।
Category - चैतन्य नीति
मूर्ख लोगों से वाद-विवाद नहीं करना चाहिए। मूर्खों के साथ विवाद करने से अपना ही समय नष्ट होता है।
जो बहुत धन, विद्या तथा ऐश्वर्य को पाकर भी इठलाता नहीं है, वही सच्चा पंडित कहा जाता है।
जिस प्रकार समुद्र को पार करने में नाव की जरूरत होती है, उसी प्रकार स्वर्ग के लिए सत्य ही एकमात्र सीढ़ी है।
जो व्यक्ति अपने मन को काबू में नहीं रख पाता, वह कभी सफलता प्राप्त नहीं कर पाता।
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जिस धन को कमाने में मन तथा शरीर का क्लेश हो, धर्म का उलंघन करना पड़े, सिर शत्रु के सामने झुकाना पड़ जाए, ऐसे धन का विचार त्यागना ही बेहतर है।
घर, गाड़ी, संतान, धन, संतान और आय आदि के मामले में हमेशा खुश रहना चाहिए लेकिन ज्ञान के मामले में कभी भी संतुष्ट नहीं होना चाहिए।
अच्छे आचरण से दुखों से मुक्ति मिलती है, विवेक से अज्ञानता खत्म की जा सकती है और जानकारी से भय को दूर किया जा सकता है।
बुरे समय में भी धैर्य और आत्मविश्वास नहीं खोना चाहिए। दोनों गुण होने से मनुष्य विषम परिस्थितियों से निकलने में भी सक्षम रहता है।
फूलों की सुगंध केवल उसी दिशा में महकती है, जिस दिशा में हवा चल रही होती है। जबकि इंसान के अच्छे गुणों की महक चारों दिशाओं में स्वतः ही फैल जाती है।








