मंथन पत्रिका

प्रेम मकान को घर बनाता है और संवेदनाएं घर को मंदिर बना देती हैं – आचार्य अनुभव सागर जी

लोग कहते हैं कि धर्मात्मा व्यक्ति मरकर स्वर्ग जाता है, जबकि वास्तविकता तो यह है कि धर्मात्मा व्यक्ति जहां भी जाता है वहां का वातावरण स्वयं ही स्वर्ग जैसा हो...

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