संत परिचय

संत परिचय - आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज जीवन परिचय

• पूर्व नाम : श्री प्रदीप कुमार जैन • पिता : श्रीमान राधेश्याम अग्रवाल • माता : श्रीमती सावित्री देवी अग्रवाल • विशेषता : वैष्णव धर्म से जैन धर्म परिवर्तन •...

हमारी संस्कृति और पर्व

जैन शासन के देवी देवताओं का सम्मान पर्व नवरात्रि

जैन धर्म में नवरात्रि नवरात्रि….नौ दिन तक मनाया जाने वाला दैविय अनुष्ठानों का पर्व। यह पर्व जैन दर्शन में भी अत्यंत महत्वपूर्ण है और देवी देवताओं के सम्मान...

कथा सागर

स्वाध्याय – 10 : श्रवणबेलगोला के भगवान बाहुबली की मूर्ति की ऊंचाई का वर्णन

श्रवणबेलगोला के भगवान बाहुबली की मूर्ति की ऊंचाई – 58.8 फीटपांव की ऊंचाई – 2’8’’पांव की आदि से घुटने तक – 15’2’’पांव की आदि से कमर रेखा तक...

कथा सागर

स्वाध्याय – 9 : ऐरावत हाथी का वर्णन

ऐरावत हाथी एक लाख योजन विस्तार वाला होता है। एक ऐरावत हाथी के 32 मुख होते हैं। एक एक मुख पर चार चार दांत। प्रत्येक दांत पर एक एक तालाब होता है। एक एक तालाब पर...

कथा सागर

स्वाध्याय – 8 : अष्ट प्रातिहार्य

देवों के द्वारा रचित अशोक वृक्ष आदि को प्रातिहार्य कहते हैं। वे आठ होते हैं-1. अशोक वृक्ष, 2. तीन छत्र, 3. रत्नजड़ित सिंहासन, 4. दिव्यध्वनि, 5. दुन्दुभिवाद्य...

कथा सागर

स्वाध्याय – 7 : अरिहंत परमेष्ठी के देवकृत 14 अतिशय

1. अर्धमागधी भाषा-भगवान् की अमृतमयी वाणी सब जीवों के लिए कल्याणकारी होती है तथा मागध जाति के देव उन्हें बारह सभाओं में विस्तृत करते हैं। 2. मैत्रीभाव-प्रत्येक...

कथा सागर

स्वाध्याय – 6 : अरिहंत परमेष्ठी के केवलज्ञान के 10 अतिशय

1. भगवान् के चारों ओर सौ-सौ योजन (चार कोस का एक योजन,एक कोस में दो मील एवं 1.5 कि.मी. का एक मील) तक सुभिक्षता हो जाती है अर्थात् अकाल आदि नहीं पड़ते हैं। 2...

कथा सागर

स्वाध्याय – 5 : अरिहंत परमेष्ठी के जन्म के 10 अतिशय

1. अतिशय सुन्दर शरीर, 2. अत्यन्त सुगंधित शरीर, 3. पसीना रहित शरीर, 4. मल-मूत्र रहित शरीर। 5. हित-मित-प्रिय वचन, 6. अतुल बल, 7. सफेद खून, 8. शरीर में 1008 लक्षण...

धर्म

जानिए तीर्थंकर भगवान का प्रथम आहार किस पदार्थ का हुआ किसने कराया

धर्मानुरागी बधुओं तीर्थंकर भगवानों के प्रथम आहार का बहुत महत्व है तो जानते है कि किस तीर्थंकर भगवान का प्रथम आहार किस पदार्थ का हुआ और किस के हाथों से हुआ- २४...

कथा सागर

स्वाध्याय – 4 : वास्तु शास्त्र

आदिकाल से ही हमारे पूर्वज वास्तु के अनुसार भवनों को निर्माण करते रहे हैं। हमारे देश में जितनी भी ऐतिहासिक इमारतें एवं भवन है उन सभी में वास्तु के सिद्धान्तों...

You cannot copy content of this page