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भगवान के दर्शन से सम्यक दर्शन की प्राप्ति होती हैं :  आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का प्रतापनगर में मंगल प्रवास


आचार्य श्री वर्धमानसागर जी का जयपुर नगर की ओर मंगल विहार चल रहा है। 7 मार्च को जैन बाहुल्य सेक्टर 10 प्रताप नगर में 34 साधु सहित भव्य मंगल प्रवेश हुआ। जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर…


जयपुर। आचार्य श्री वर्धमानसागर जी का जयपुर नगर की ओर मंगल विहार चल रहा है। 7 मार्च को जैन बाहुल्य सेक्टर 10 प्रताप नगर में 34 साधु सहित भव्य मंगल प्रवेश हुआ। धर्मसभा को संबोधित कर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने बताया कि प्रताप नगर में पहली बार विशाल संघ का प्रवेश हुआ। जैनधर्म अनादि निधन भगवान द्वारा बताया धर्म है। हमारे भगवान वीतरागी है। विषय भोगों के कारण आप लोग महान जैनधर्म और गुरुओं को भूल रहे हैं। भगवान के दर्शन से सम्यक दर्शन प्राप्त होता है। भगवान के दर्शन बैठकर विनयपूर्वक निराकुलता से करना चाहिए। यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने प्रकट की। प्रतापनगर जैन समाज के अध्यक्ष धर्मचंद परानता एवं मंत्री महेश सेठी ने बताया कि आचार्यश्री के चरण प्रक्षालन प्रकाश, पारस पुरण चुरू वाले परिवार ने किया।शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य निर्मलकुमार, निरमेश पाटौदी को प्राप्त हुआ। मंच संचालन जीतेंद्र जैन जीतू ने किया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने उपदेश में बताया कि गुरुजन भी वीतरागी भगवान के अनुयाई है और इस मार्ग पर चल रहे हैं। जैनधर्म के गौरव को हमें भूलना नहीं चाहिए। प्रताप नगर महाराणा प्रताप के नाम पर है। प्रताप जीवन में प्रकट हो। जीवन में प्रतापता का प्रकट करें, जीवन में कर्म,धार्मिक कार्यों के प्रताप संयम तप रूपी अग्नि से नष्ट करें और जिनालय से प्रताप प्राप्त करें। धर्म मार्ग से बुराइयों को नष्ट करें।

मोबाइल के दुष्परिणामों के बारे में बताया। 7 मार्च को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का दोपहर को प्रताप नगर से 5 किमी मंगल विहार होकर श्री महावीर दिगम्बर मंदिर चित्रकूट कॉलोनी में रात्रि विश्राम हुआ। 8 मार्च को प्रातः 5 किमी मंगल विहार श्री चंद्र प्रभ जिनालय सेक्टर 10 मालवीय नगर में होगा। संघ की आहार चर्या भी यही होगी। प्रतिदिन जयपुर के विभिन्न मंदिरों के व्यक्तियों द्वारा श्रीफल भेंटकर प्रवेश का निवेदन किया जा रहा है।

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