जैन धर्म के 7वें तीर्थंकर भगवान सुपार्श्वनाथ का जन्म और तप कल्याणक 7 जून को भक्ति भाव से मनाया जाएगा। भगवान सुपार्श्वनाथ जी का जन्म और तप कल्याणक तिथि के अनुरूप ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशी के दिन मनाया जाता है। इस बार यह तिथि 7 जून को आ रही है। इंदौर नगर सहित देश के दिगंबर जैन मंदिरों में पूजा-अर्चना के विशेष आयोजन होंगे। मंदिरों में प्रातः मंत्रोच्चार से श्रीजी के अभिषेक के बाद विश्व में सुख, समृद्धि व खुशहाली की कामना की जाएगी। श्रीफल जैन न्यूज की विशेष श्रृंखला के तहत उपसंपादक प्रीतम लखवाल द्वारा संकलित यह प्रस्तुति पढ़िए….
इंदौर। जैन धर्म के 7वें तीर्थंकर सुपार्श्वनाथ जी का जन्म वाराणसी में हुआ था। उनका जन्म इक्ष्वाकु वंश के राजा प्रतिष्ठा और रानी पृथ्वी के यहां हुआ था। जब उनका जन्म हुआ तब तिथि ज्येष्ठ शुक्ल की द्वादशी थी। भगवान सुपार्श्वनाथ ने अपना तप भी वाराणसी में ही पूर्ण किया था, जहां उन्होंने तपस्या कर मोक्ष प्राप्त किया था। भगवान सुपार्श्वनाथ जी की जन्मस्थली वाराणसी में भदैनी में स्थित एक जैन मंदिर में है और उनकी तपस्थली, जहां सुपार्श्वनाथ जी ने तपस्या की वह सहेतुक वन में है। भगवान सुपार्श्वनाथ जी के जन्म व तप कल्याणक 7 जून ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशी के दिन मनाया जाएगा। देशभर के दिगम्बर जैन मंदिरों में पूजा अर्चना के विशेष और खास कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मंदिरों में प्रातः मंत्रोच्चार से श्रीजी के अभिषेक के बाद विश्व में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना कर शांतिधारा होगी।
भगवान सुपार्श्वनाथ की अष्ट द्रव्य से पूजा अर्चना होगी। पूजा के दौरान जन्म कल्याणक श्लोक ‘सुकलजेठ दुवादशि जन्मये, सकल जीव सु आनन्द तन्मये। त्रिदशराज जजैं गिरिराजजी, हम जजैं पद मंगलसाजजी।।’ का जाप करते हुए जन्म कल्याणक अर्घ्य चढ़ाया जाएगा। इसी अनुरूप तप कल्याणक श्लोक के जाप और जयकारों के साथ तप कल्याणक अर्घ्य चढ़ाया जाएगा। साथ ही भगवान सुपार्श्वनाथ की महाआरती कर जैन समाज के श्रद्धालु भक्ति भाव से पुण्यार्जन करेंगे।













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