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भावना योग से सकारात्मकता आई और नकारात्मक विचार मिटेः छत्रपति नगर दलाल बाग में हुई मुनिश्री की धर्मसभा


मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने सुबह धर्मसभा में ‘भावनायोग’ कराते हुए छत्रपति नगर दलाल बाग में प्रबोधन दिया। उन्होंने इसका उपयोग करने से होने वाले प्रभावों के बारे में जैन श्रावकों को सजग किया। रविवार को आधार शिला रखी जाएगी। पढ़िए इंदौर से यह खबर…


इंदौर। जो मेरे भीतर शुद्ध परमात्मा है वह मैं हूं, जो इस ‘भावना’ का शुद्ध भाव से ध्यान करता है। वह सम्यक दर्शन ज्ञान चरित्र को प्राप्त कर मोक्ष को प्राप्त कर सकता है। यह उद्गार मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने सुबह धर्मसभा में ‘भावनायोग’ कराते हुए छत्रपति नगर दलाल बाग में व्यक्त किए। महोत्सव के अंतिम दिन मुनि श्री ने कहा भावना योग तन को तो स्वस्थ करता ही है। यह मन को भी मस्त कर आत्मा को पवित्र बनाता है। इसके नियमित प्रयोग से कैंसर जैसे रोग पर भी विजय प्राप्त की जा चुकी है। ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं।

नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिली

उन्होंने कहा कि तो यहां तक कहता हूं कि नियमित भावनायोग करने वालों की ‘अकालमृत्यु’ नहीं होगी। इससे इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत होता है तथा खोया हुआ आत्म विश्वास बढ़़ता है। यह प्रमाणित हो चुका है जिन लोगों ने नियमित भावनायोग किया। उनके विचारों में सकारात्मकता आई तथा नकारात्मक विचारों से मुक्ति मिली। उन्होंने कहा कि आप लोग गुरु से आशीर्वाद लेते हो और आपका मन प्रसन्न हो जाता है यह क्या है? यह भी हमारे अवचेतन मन पर पड़ने वाला एक प्रभाव ही तो है।

सभी कार्य सहज में होते चले जाते हैं

अवचेतन मन पर आशीर्वाद से अंतः स्रावी ग्रंथियां में परिवर्तन आता है तो हमारे अंदर उत्साह और नवऊर्जा का संचार होता है तथा आनंद की अनुभूति होती है और सभी कार्य सहज में होते चले जाते है। उन्होंने आशीर्वाद की चर्चा करते हुए कहा कि हमारे अंदर जितनी भी मनोविकृतियां हैं यहां तक कि जो लोग मानसिक अवसाद से ग्रसित होकर आत्महत्या की भावना तथा अनिंद्रा जैसी बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं, उन्हें इन बीमारियों से मुक्ति मिली है।

‘मुझे शांत रहना है’

मुनिश्री ने एक प्रयोग कराते हुए कहा कि ऐसा कोई व्यक्ति सभा में नहीं होगा। जिसे कभी गुस्सा नहीं आया हो अथवा किसी के गुस्से का शिकार ना बना हो जिन लोगों को बात-बात पर गुस्सा आता हो। ऐसे लोगों को नियमित भावना योग करना चाहिए ‘मुझे शांत रहना है’ इस एक बोध वाक्य ने लोगों की जिंदगियां बदल दी। उन्होंने कहा कि ‘मुझे शांत रहना है’ का बोध वाक्य जब हम बारबार दोहराते है तो उसका असर हमारे अवचेतन मन पर पड़ता है और धीरे-धीरे हमारा गुस्सा शांत हो जाता है।

आत्म विश्वास के साथ परफॉर्मेंस मजबूत

उन्होंने कहा कि ऐसे कई प्रमाण सामने आए हैं। अनेक लोग जो प्रचंड क्रोधी थे वह शांतमूर्ति बन गए। सभा में यदि कोई हो तो वह भी नियमित 90 दिन का अभ्यास करें तो उनके जीवन में वह भी व्यापक परिवर्तन महसूस करेंगे। उन्होंने कहा कि भावना योग से जिन बच्चों का पढ़़ने में मन नहीं लगता था। उन विद्यार्थियों की एकाग्रता बढ़ी और आत्म विश्वास के साथ परफॉर्मेंस मजबूत हुआ। वह नीट तथा आईआईटी जैसी परीक्षा में अच्छी रेंक के साथ उत्तीर्ण हुए।

मुनि संघ भी रहा मौजूद

धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू एवं प्रवक्ता अविनाश जैन विद्या वाणी ने बताया कि तेज ठंड का प्रभाव होने के बाबजूद भी बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। इस अवसर पर मुनिश्री निर्वेगसागर महाराज, मुनिश्री संधान सागरजी, महाराज सहित सभी क्षुल्लक विराजमान थे।

श्रीजी की भव्य शोभायात्रा निकली

आज की धर्म सभा के पूर्व श्रीजी की भव्य शोभा यात्रा निकली शोभायात्रा में शोधर्म इंद्र भुपेंद्र जैन हाथी पर सवार होकर धर्म ध्वजा के साथ एवं कुबेर इन्द्र नरेंद्र नायक, राकेश नायक, राजेन्द्र नायक रथ पर विराजमान श्री जी को लेकर जिनालय पहुंचे। इस अवसर डॉ. जैनेंद्र जैन, कमल जैन, चैलेंजर, डीएल जैन, प्रकाश दलाल, कैलाश वेद, अनिल जैन, परवार समाज महिला संगठन की अध्यक्ष मुक्ता जैन आदि शामिल हुए।

मुनि संघ का मंगल विहार रेवती रेंज की ओर

दोपहर में 1.30 बजे शंका समाधान के बाद मुनि संघ का मंगल विहार छत्रपति नगर से रेवती रेंज की ओर हुआ। रात्रि विश्राम सिद्ध विहार कॉलोनी में होकर रविवार को सुबह नवीन जिनालय की आधारशिला रखने के बाद मुनिसंघ रेवतीरेंज की ओर प्रस्थान करेंगे तथा आहारचर्या वहां संपन्न होगी।

कार्यक्रम में शामिल होने की अपील

यहां पर दोपहर एक बजे सहस्त्रकूट जिनालय की आधारशिला मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ससंघ एवं मुनिश्री विनम्र सागर महाराज ससंघ एवं आर्यिका दुर्लभमति संसघ सानिध्य में रखी जाएगी। दयोदय चेरिटेबल फाउंडेशन ट्रस्ट रेवती रेंज के समस्त पदाधिकारिओं तथा धर्म प्रभावना समिति के महामंत्री हर्ष जैन एवं दद्दू ने सभी महानुभावों से कार्यक्रम में पधारने की अपील की है।

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