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स्वामी जी ने दिया था महामस्तकाभिषेक में मंगलाचरण गाने का मौका : भजन सम्राट रूपेश जैन ने दी स्वामी चारूकीर्ति जी को श्रद्धांजलि


प्रख्यात जैन भजन गायक रूपेश जैन में स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक महास्वामीजी के जन्मदिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए भावभीना भजन प्रस्तुत किया है। इस मौके पर श्रीफल जैन न्यूज ने उनसे बातचीत की है। प्रस्तुत हैं उसी के कुछ खास अंश…


टीकमगढ़। प्रख्यात जैन भजन गायक रूपेश जैन में स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक महास्वामीजी के जन्मदिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए भावभीना भजन प्रस्तुत किया है। स्वामीजी के करीबी रहे रूपेश इसे स्वामीजी के प्रति अपनी छोटी सी विनयाजंलि मानते हैं। इस अवसर पर श्रीफल जैन न्यूज ने उनसे बात की है। प्रस्तुत हैं उसी बातचीत के प्रमुख अंश….

आपको स्वामीजी पर भजन गाने की प्रेरणा कहां से मिली?

मेरे तो स्वयं के भाव भी यही थे। स्वामीजी का इतना आशीर्वाद मिला है मुझे जीवन में, तो मुझे लगा कि मैं बतौर श्रद्धांजलि कुछ पंक्तियां उनके लिए अर्पित करूं। इसके अलावा सरिता अम्मा की प्रेरणा भी थी, जो श्रवणबेलगोला में दो पंचकल्याणकों में सौधर्म इंद्राणी बनी थीं। वह 2018 में हुए महामस्तकाभिषेक की कमेटी की अध्यक्ष भी थीं। स्वामी जी से जुड़े और आचार्य देव नंदी जी के शिष्य मुनि श्री अमोघ कीर्ति जी का भी आशीर्वाद था।

स्वामीजी के लिए बनाए इस गीत के बोल किसने लिखे हैं, इसे संगीतबद्ध किसने किया है?

इस गीत को लिखा भी मैंने है, इसका संगीत दादू रवींद्र जैन का है। मैंने उनकी धुन इसलिए ली है क्योंकि उनका भी स्वामीजी के साथ बहुत बड़ा जुड़ाव था और स्वामीजी भी उन्हें बहुत मानते थे। मैं चाहता था कि प्रत्यक्ष नहीं, परोक्ष रूप से उनकी भी श्रद्धांजलि स्वामीजी के चरणों में पहुंचे।

स्वामीजी के असमय समाधिलीन होने से जैन समाज को कितनी बड़ी क्षति हुई है?

स्वामीजी को जो भी जरा सा नजदीक से जानता था, वह बता सकता है कि समाज ने क्या खोया है। बहुत बड़े-बड़े संस्थान हैं, जहां से लोग मैनेजमेंट सीखते हैं, लेकिन वह अपने आप में संपूर्ण रूप से एक संस्थान थे, जहां से आप मैनेजमेंट सीख सकते हैं, चरित्र-अनुशासन सीख सकते हैं। आप उनसे धर्म सीख सकते हैं और उसे व्यावहारिक रूप से जीवन में कैसे उतारना है, यह भी सीख सकते हैं। वह कहने को वस्त्रधारी थे लेकिन मुनि चर्या का पालन करते थे। उनकी खासियतें गिनाई नहीं जा सकतीं। कितने ही स्कूल, कॉलेज, चिकित्सालय उनके द्वारा खोले गए, यह उनका समाज के प्रति बहुत बड़ा उपकार है। ऐसे महान व्यक्तित्व का फिर से इस धरती पर आना मुश्किल है।

उनसे जुड़ा कोई संस्मरण जो इस अवसर पर बताना चाहते हैं?

वह एक ऐसा व्यक्तित्व थे, जिनसे मिलने के लिए बड़े-बडे़ मंत्रियों, अधिकारियों को समय लेना पड़ता था लेकिन उनकी मुझ पर विशेष कृपा था। उन्होंने वर्ष 2018 के महामस्तकाभिषेक से पहले मुझे बुलाया और कहा कि इसकी शुरुआत आपके मंगलाचरण से होगी। कर्नाटक सरकार से उन्होंने मेरा वह कार्यक्रम अनुमोदित कराया। मैं उनकी सहजता देखकर हैरान था। उन्होंने महामस्तकाभिषेक के दौरान खुद मेरा परिचय कर्नाटक सरकार के मंत्रियों और वहां मौजूद जानी-मानी हस्तियों से कराया। वह मुझसे हमेशा कहा करते थे कि आप रवींद्र जैन जी के बाद दूसरे कलाकार हैं, जिनका गीत हमारे यहां शहनाई वाले, छोटी-छोटी भजन मंडली वाले सुनाया-बजाया करते हैं।

स्वामीजी के जन्मदिन पर कुछ विशेष संदेश आप देना चाहते हैं?

हम सभी आयु कर्म से जुड़े हुए हैं लेकिन हम चाहते हैं कि स्वामी जी जैसा ही व्यक्तित्व उस बागडोर को संभाले रहे। तो स्वामीजी के बाद नए स्वामीजी बने हैं, मैं चाहता हूं कि आज बड़े स्वामीजी के जन्मदिन पर उनका सारा आशीर्वाद नए चारूकीर्ति स्वामीजी को मिले। और स्वामीजी भी शायद यही चाहते होंगे। उनका ज्ञान और अनुभव भी नए स्वामीजी को मिले सके, यही कामना है। मैं यह भी कहना चाहता हूं कि जब हम श्रवणबेलगोला जाएं तो स्वामीजी के सिद्धांतों का मनन करें। समाज को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दें।

भजन में बताया है स्वामीजी को दक्षिण का सूर्य

स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक महास्वामी के व्यक्तित्व के बारे में गायक रूपेश जैन ने अपने भजन के जरिए गुणगान किया है। उन्होंने स्वस्तिश्री चारुकीर्ति भट्टारक महास्वामी को दक्षिण का सूर्य बताया है जिनकी कीर्ति चारों दिशाओं में फैली। अपने कार्यों से वे जगत में पूजनीय बने। भजन में उनकी महिमा के बारे में बताया है कि वे महातपस्वी, अतुलित ज्ञानी और ऐसे भट्टारक थे जिन्होंने विश्वव्यापी महामस्तकाभिषेक कराया। भक्ति में अपना पूरा जीवन बिताया और प्रभु को अपना सर्वस्व समर्पण किया। उन्होंने शिक्षा, सेवा और संस्कारों से लाखों लोगों का जीवन बदल दिया। अधीर को धीर बनाया।

कौन हैं रूपेश जैन

मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ में जन्मे रूपेश जैन जाने-माने भजन गायक हैं। जाने-माने संगीतकार और गायक रवींद्र जैन के बाद जैन भजन गायकों के बीच इनकी अपनी अलग पहचान है। यूट्यूब पर इनके 45 हजार से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं और यूट्यूब हजारों,लाखों बार इनकी रचनाएं सुनी जा चुकी हैं। इनके कई भजनों को एक लाख से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं।

इस भजन को यहां सुनें

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