जगतपूज्य मुनिपुंगव सुधासागर महाराज एवं क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज के मंगल सानिध्य में आयोजित श्री पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव में भगवान का जन्मकल्याणक महोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया। पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट…
पृथ्वीपुर। जगतपूज्य मुनिपुंगव सुधासागर महाराज एवं क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज के मंगल सानिध्य में पृथ्वीपुर में आयोजित श्री पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव में भगवान का जन्मकल्याणक महोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया। सुबह में जिन अभिषेक और शांतिधारा पूजन किया गया। जन्मकल्याणक महोत्सव में सोमवार को नवप्रभात की नवकिरण के साथ तीर्थंकर बालक आदिकुमार का जन्म, बधाईयां, सौधर्म इंद्र द्वारा अयोध्या की तीन परिक्रमा, अयोध्या में राजदरबार में सौधर्म शचि का मंगल प्रवेश के अलौकिक दृश्य की प्रस्तुति हुई।
मुनिराज स्वयं के पास कुछ नहीं रखते
पूज्य मुनिपुंगव सुधासागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि जो मुनिराज स्वयं के पास कुछ भी नही रखते है लेकिन चाहते है कि मेरा भक्त धनवान बने। गुरु की ये दुआ तुम्हे लेनी है, जाओ ये दुआ तुम्हें दस-दस भव तक कंगाल नही होने देगी। क्योंकि गुरु महाराज जानते है कि इस भक्त के पास धन बढ़ेगा तो ये मन्दिर बनवाएगा, अस्पताल बनवाएगा, स्कूल खुलवाएगा। इसके पास जितना-जितना धन बढेगा उतना उतना धर्म बढ़ेगा। इतना पुण्य करते जाना कि गुरु चाहे कि ये भक्त सदैव स्वस्थ बना रहे ताकि ये भक्त जीवन भर मन्दिर आता रहे। कभी गुरु से ये अभिशाप मत ले लेना कि गुरु चाहे कि भक्त संसार से जल्दी निपट जाए। सतियो ने कहा-हे भगवान इतना सौंदर्य मत दे देना कि लोगों का मन बिगड़ जाए। लोगो का मन बिगड़ जाए ये दुनिया का लक्षण है। लोगों का मन न बिगड़े ये सती का लक्षण है। तीर्थंकर बालक का गजब का सौंदर्य होता है, लेकिन उन्हें देखकर लोगो के परिणाम बिगड़ते नही है, उन्हें देखकर परिणाम सुधरते है। वह सौंदर्य भी किस काम का जो दूसरों का मन बिगाड़ दे।

शोभायात्रा निकाली
भगवान के जन्म होने के उपरांत पृथ्वीपुर नगरी में बहुत ही धूमधाम से जन्म कल्याणक की शोभायात्रा निकाली गई। ऐरावत हाथी पर आरूढ़ होकर सौधर्म-शचि द्वारा तीर्थंकर बालक को पाण्डुक वन लाया और पाण्डुक शिला पर तीर्थंकर बालक आदिकुमार का 1008 कलशों से जन्माभिषेक श्रृंगार किया गया। शोभायात्रा का जगह जगह स्वागत किया गया, मिष्ठान वितरण किया गया। सारे नगर को दुल्हन की तरह सजाया गया। जन्मोत्सव पर सभी लोग झूम उठे और एक दूसरे को बधाइयां प्रेषित कीं। सारी धार्मिक क्रियाएं ब्रह्मचारी प्रदीप भैया सुयश के दिशा-निर्देश में संपन्न हुई। संगीतकार नीलेश जैन एंड पार्टी के द्वारा मधुर भजन की प्रस्तुति की।













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