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भगवान पार्श्वनाथ स्वामी का पहली बार अष्ट द्रव्य से पूजन और पंचामृत अभिषेक


पंचामृत अभिषेक से भाव निर्मल होते है, अभिषेक करने से जल आदि द्रव्य गंधोदक बन जाता है

भीलूड़ा / डूंगरपुर। जिले के भीलूड़ा गांव के शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज एवं क्षुल्लक अनुश्रमण सागर महाराज के सानिध्य एवं तुष्टी दीदी के निर्देशन में पंचकल्याणक के बाद स्फटिक के भगवान पार्श्वनाथ स्वामी पहली बार अष्ट द्रव्य से पूजन और पंचामृत अभिषेक किया गया। पूजन में जल, नारियल, इक्षु रस, दूध, दही, घी,चावल आटा, हल्दी, सर्वौषधि, चार कलश, श्रीगंध, लाल चंदन, सफेद चंदन, अष्टगंध, केशर, रजत पुष्प, पुष्प वृष्टि, कुम्भ कलश, रत्न वृष्टि की गई। भगवान की शांतिधारा व अारती की गई। महा अाराधना का शुभारंभ मंगलाष्ट से तुष्टी दीदी ने किया ।

सर्वप्रथम तीर्थंकर की प्रतिमा पर जल अभिषेक तुष्टी दीदी ने किया। उसके बाद क्रम से नारियल पानी से अभिषेक प्रतिभा अशोक टूकावत , इक्षु रस से कुणाली जैन, दूध से हितेश भरड़ा, दही से सुभाष शाह ,घी से रचित जैन, चावल के आटे से कमलेश शाह, हल्दी से सुशांत जैन , सर्वौषधि से चंद्रकांत भरड़ा ,चार कलश से चेतना भरड़ा, श्रीगंध से ओम प्रकाश भरड़ा, लाल चंदन से जिनेश जैन, सफेद चंदन से हितेश जैन,अष्टगंध से रमणलाल टूकावत, केसर से हितेश शाह, रजत पुष्प वृष्टि धनपाल भरड़ा, पुष्प वृष्टि धर्मेंद्र जैन, कुंभ कलश मिनेष शाह, आरती कामिनी दीपक शाह, रत्नवृष्टि हितेश शाह, शांतिधारा हितेश भरड़ा को करने का लाभ मिला । इस अवसर पर श्री फल परिवार के सदस्य व समाज के कांतिलाल जैन, धर्मेश जैन, मिनेश जैन, मनोज जैन, भरत जैन, भरत शाह, निखिल शाह, कमलेश टूकावत आदि उपस्थित रहे।
अन्तर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज ने कहा कि तीर्थंकर की प्रतिमा पर अभिषेक करने से कर्मो की निर्जरा होती है। देवता पांडुक शिला पर 1008 कलशों से अभिषेक करते है । पंचामृत अभिषेक से भाव निर्मल होते हैं। अभिषेक करने वाले को तीर्थंकर की प्रतिमा स्पर्श करने का लाभ मिलता है। अभिषेक करने के बाद जल आदि द्रव्य गंधोदक बन जाता है तो वह गंधोदक अनेक शारीरिक रोग दूर करता है।

रिपोटिंग -धर्मेंद्र जैन

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