सारांश
शाही पंचकल्याणक प्रतिष्ठा में जन्मोत्सव की भव्य शोभायात्रा अभिनंदनोदय तीर्थ से अयोध्यापुरी पहुंची। इस मौके पर जैन आर्मी ने सैन्य शक्ति प्रदर्शन किया। तीर्थंकर बालक आदिकुमार के जन्म की खुशियां मनाई गई। इस अवसर पर अनेक मांगलिक कार्यक्रम हुए। पढ़िए राजीव सिंघई की विस्तृत रिपोर्ट…
ललितपुर। श्रीमज्जिनेन्द्र शाही पंचकल्याणक प्रतिष्ठा गजरथादिक एकादश रथोत्सव अभिनंदनोदय तीर्थ की अयोध्यापुरी मेें तीर्थंकर बालक आदिकुमार का जन्मोत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। घंटा-घडियाल व वाद्य यंत्रों की डंकार के बीच जय-जयकारों की गूंज हुई। महाराजा नाभिराय के दरवार में अयोध्यानगरी के राजदरबारियों ने नृत्य कर खुशियां मनाईं। कुबेर इन्द्र द्वारा तीर्थंकर बालक आदिकुमार के जन्मोत्सव पर अपने खजाने के द्वार खोल दिए और नगर की प्रजा को दान दिया।

अभिषेक संसार में सुख समृद्धि का कारण
निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज ने धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए भगवान के जन्मकल्याणक के अभिषेक को संसार में सुख समृद्धि का कारण बताया और कहा कि यह संसार की हजारों समस्याओं का निदान है और जन्म-जन्मों से मुक्ति का मार्ग है। मुनि श्री ने भगवान के जन्मकल्याणक के इस अभिषेक की महिमा बताते हुए कहा कि जन्माभिषेक का गंधोदक दुख, दर्द, दरिद्रता को दूर करेगा। यह परिवार में सुख, समृद्धि और व्यापार आदि को बढाने का कारण होगा। प्रभु का गंधोदक जब घरों में पहुचता है तो उससे वातावरण निर्मल होकर दूषित माहौल दूर होगा। यह धर्म, संस्कृति और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने बताया कि बालक आदिकुमार का जीव 10 भवों तक इस संसार में भ्रमण करता रहा। जब उसने मुनिराज के दर्शन किए और मुनिराज ने संबोधित किया कि तुम तो एक भव्य जीव हो, आगे चलकर तुम्हें जैन धर्म का प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ बनना है। वही आदिकुमार का जीव महाराजा नाभिराय की अर्धांगिनी माता मरूदेवी के गर्भ में पहुंचा, जो आगे चलकर जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ बने। उन्होंने कि कहा नारी पर्याय कहीं भी धन्य नहीं होती लेकिन जब नारी बालक को जन्म देकर मां बनती है और शचि बनकर पहला दर्शन कराती है तो संसार में इस पुण्य का कोई मुकाबला नहीं कर सकता। उन्होने कहा कि संसारी मां को गर्भ से सूतक लगते हैं, जिससे कुल-परिवार धर्म से वंचित रहता है लेकिन तीर्थंकर बालक के जन्म लेते समय किसी को एक क्षण का सूतक नहीं लगता। वह इतने पवित्र होते हैं कि जन्म होते ही दस अतिशय आते हैं। ये तपस्या और उपादान शक्ति लेकर जन्मे, जिन्होंने पूरे संसार को सन्मार्ग बताया।

भक्ति का माहौल
धर्मसभा के प्रारम्भ में मुनि सुधासागर महाराज का पादप्रक्षालन पुण्यार्जक परिवार द्वारा किया गया। इस मौके पर संघस्थ मुनि पूज्यसागर महाराज, एलक धैर्यसागर महाराज, क्षुल्लक गम्भीर सागर महाराज का सानिध्य पाकर श्रावक अभिभूत रहे। इसके पूर्व प्रातःकाल प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया सुयश के मार्गदर्शन में श्रीजी के अभिषेक, शान्तिधारा के उपरान्त नमित्तक पूजन हुई। इसमें उपस्थित इन्द्र-इन्द्राणियों ने सम्मलित होकर पुण्यार्जन किया। इसके उपरान्त तीर्थंकर महाराजा नाभिराय के दरबार में पुत्ररत्न की प्राप्ति की जानकारी पर जय-जयकारों की गूंज हुई। स्वयंसेवी संगठनों के दिव्यघोष के साथ पूरी अयोध्यापुरी में नृत्य और भक्ति का माहौल रहा। सौधर्म इन्द्र-शचि इन्द्राणी के मध्य प्रथम दर्शन केा लेकर वार्ता का मंचन किया गया। इसके उपरान्त सौधर्म इन्द्र-शचि इन्द्राणी ऐरावत हाथी पर सवार होकर तीर्थंकर बालक को अभिनदनोदय तीर्थ पाण्डुक वन की ओर ले गए, जहां से भव्य जन्मोत्सव की शोभायात्रा नगर में निकली।

जैन आर्मी के साथ निकली शोभायात्रा
अभिनंदनोदय तीर्थ से प्रारम्भ हुई तीर्थंकर बालक आदिकुमार के जन्मोत्सव की भव्य शोभायात्रा पंचकल्याणक महोत्सव स्थल अयोध्या नगरी से चलकर नगर के प्रमुख मार्ग से प्रारम्भ हुई, जिसमें 108 मांगलिक कलश रथ के साथ आगे-आगे नवगठित जैन आर्मी के अधिकारी विशेष वाहनों में अभिवादन करते हुए चल रहे थे। उनके पीछे दो पहिया वाहनों पर सैन्य अधिकारी ध्वज पताकाओं के साथ अनुशासित रहे। सतेन्द्र- प्रतेन्द्र इन्द्र-इन्द्राणी के पीछे सामान्य इन्द्र इन्द्राणियां केसरिया ध्वजों के साथ चल रहे थे। शोभायात्रा में महिला मण्डल भी था। प्रतिष्ठा महोत्सव के प्रमुख पात्र शिरोमणि श्रावक श्रेष्ठी महेन्द्र कुमार सराफ, विधि यज्ञनायक प्रभात कुमार सराफ, भरत चक्रवर्ती रवीन्द्र अलया, बाहुबली संजीव कुमार ममता स्पोर्ट, ईशान इन्द्र विनय कुमार जैन मडावरा, सानत इन्द्र संजीव कुमार लकी, माहेन्द्र राजीव कुमार लकी, यज्ञनायक- महेन्द्र कुमार सराफ, अखिलेश गदयाना, विनय जैन जडीबूटी, आलोक जैन लागौन, राजेन्द्र सराफ, संदीप सराफ लालू, वीरेन्द्र कुमार गंगचारी, महेन्द्र कुमार पालीवाले, राजकुमार खिरिया, राजा श्रेयांस राजीव अनौरा, राजा सोम डॉ. अक्षय टडैया, ब्रह्मेन्द्र राजेश सिंघई धौर्रा, लान्तव इन्द्र लोकेश सराफ, शुक्र इन्द्र शुभम सराफ, प्राणत इन्द्र अभय जैन पारौल, आणत इन्द्र श्रीस सिंघई, आरण इन्द्र अभिनंदन कुम्हैडी, शतार इन्द्र पदमचंद मिठया, महामण्डलेश्वर विकास जैन सीए, अनूप जैन मामा भांजा, सुबोध जैन सुरभि, सन्मति सराफ, सतीश नजा वग्घियों पर सवार रहे। सौधर्म इन्द्र शचि इन्द्राणी स्वतंत्र मोदी तीर्थंकर वालक को लेकर ऐरावत हाथी पर रहे। उनके साथ अन्य हाथियों पर महोत्सव के धनकुबेर अशोक दैलवारा, महायज्ञनायक संजीव जैन सीए, महाराजा नाभिराय राजेन्द्र जैन थनवारा परिवार चल रहे थे।

तीर्थंकर बालक का अभिषेक
शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्ग वर्णी चौराहा से तुवन चौराहा होते हुए तालाबपुरा सावरकर चौक घंटाघर से सदरकांटा इलाइट चौराहा होते हुए आयोजन स्थल अयोध्यापुरी पहुंची, जहां पाण्डुकशिला पर प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया सुयश ने विधिविधान के साथ 1008 कलशों से तीर्थंकर वालक आदिकुमार का अभिषेक कराया। जिसमें प्रथम अभिषेक सौधर्म इन्द्र स्वतंत्र मोदी व पुण्यार्जक परिवार ने किया। इसके उपरान्त कतारबद्ध इन्द्रों ने अभिषेक का पुण्यार्जन किया।शोभायात्रा की व्यवस्थाओं को मेला कैप्टन निदेशेक नरेन्द्र कडंकी, राजकुमार जैन, महेन्द्र सिंघई, वैभव टिन्ना, स्वदेश गोयल, धार्मिक आयोजन समिति संयोजक मनोज जैन बबीना के साथ स्वयंसेवी संगठन अनुशासित कर रहे थे। मेला व्यवस्थाओं को अनुशासित करने में दिगम्बर जैन पंचायत समिति के अध्यक्ष अनिल जैन अंचल, महामंत्री डॉ. अक्षय टडैया, शील चंद अनौरा, मंदिर प्रबंधक मोदी पंकज जैन, विजय जैन काफी, जिनेन्द्र जैन डिस्को, जिनेन्द्र जैन थनवारा, मुकेश सराफ, सत्येन्द्र गदयाना, मीना इमलिया, अभिषेक अनौरा, सनत जैन खजुरिया, संजय मोदी, संजय रसिया, नीरज मुल्लन, अक्षय अलया, राजकुमार मोदी खिरिया, अजित गदयाना, संजीव सोंरया,जीवन मिर्चवारा, आकाश जैन गैस आदि का सक्रिय योगदान मिल रहा है।

पालना झूला का हुआ कार्यक्रम
सायंकाल जिज्ञासा समाधान के दौरान मुनि श्री सुधासागर महाराज ने श्रावकों द्वारा की गई जिज्ञासाओं का सम्यक समाधान किया। इसके बाद आचार्य भक्ति हुई, जहां प्रभु की भक्ति हुई। इसके उपरान्त महाराजा नाभिराय के राजदरवार में तीर्थंकर बालक का पालना झूला कार्यक्रम हुआ, जिसमें श्रावकों ने जहां बालक आदिकुमार का पालना झुलाकर पुण्यार्जन किया, वहीं बालक आदिकुमार की बाल क्रीडा का मंचन अत्यंत मनोहारी रहा, जिसे देखकर श्रोता वाह-वाह कर उठे। मंचन लीला में संगीतकार नीलेश जैन बुढार एवं सत्येन्द्र शर्मा कंठस्थ कला केन्द्र के कलाकारों की प्रसंशनीय भूमिका रही।

तीर्थंकर बालक के जन्मोत्व पर रहा जश्न का माहौल
तीर्थंकर बालक के जन्मोत्सव पर अयोध्यापुरी से लेकर नगर में जश्न का माहौल रहा। प्रातःकाल से ही मिठाइयां बंटी। नगर में जब शोभायात्रा निकली तो उत्साह में लोगों ने जनसमुदाय का स्वागत किया। वीर व्यायामशाला, आचार्य विद्यासागर सेवा संघ, स्याद्वाद वर्द्धमान सेवा संघ, वीरसेवा संघ, आदिनाथ सेवा संघ, भारतीय जैन मिलन बाहुबलि सेवा संघ, जैन सेवा संघ, तारण तरण युवा सेवा के स्वयंसेवक अयोध्यापुरी में झूम उठे। नगर के घंटाघर चौक पर जिला उद्योग व्यापार मण्डल के प्रान्तीय चेयरमैन महेन्द्र जैन मयूर, जिला महामंत्री, आलोक जैन मयूर पार्षद, जैन शिक्षक सामाजिक समूह ने जितेन्द्र जैन राजू, सत्येन्द्र जैन, डॉ. सुनील जैन संचय, अखिल भारतीय दिगम्बर जैन परिषद ने अजय जैन साइकिल, निर्मल कुमार जैन पारौल, दीपक सिंघई बाबी, जनक जननी वृद्धाश्रम ने अमित प्रिय जैन दीपक बुखारिया, जैन एम्बुलेंस समिति ने सौरभ जैन अंकित मेडीकल जैन मिलन मुख्यशाखा के मनोज जैन चूडी, अजय अलया, अनुराग सिंघई, विमल जैन पारौल के संयोजन में जोरदार स्वागत किया गया। इसके अतिरिक्त श्रावकों ने भी शोभायात्रा की अगुवाई की।
ज्ञानोदय नगर व पार्श्वनाथ मंदिर में भी हुआ जन्मोत्सव
श्रीमज्जिनेन्द्र शाही पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान अयोध्यापुरी के अतिरिक्त नगर के अभिनंदनोदय तीर्थ,श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ज्ञानोदय नगर एवं श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया सुयश के मार्गदर्शन में जन्मकल्याणक की मांगलिक क्रियाएं पुण्यार्जक परिवारों ने की। प्रतिष्ठा की मांगलिक क्रियाएं सम्पन्न होने से नवनिर्मित मंदिर में जश्न का माहौल बना हुआ है।
प्रतिष्ठा महोत्सव में तपकल्याणक गुरुवार को
प्रतिष्ठा महोत्सव के मीडिया प्रभारी अक्षय अलया के अनुसार 2 फरवरी को प्रातःकाल नित्यमह अभिषेक, पूजन, शान्तिधारा के उपरान्त प्रातः 8.30 बजे मुनि श्री सुधासागर महाराज के प्रवचन होंगे। दोपहर 12 बजे महाराजा नाभिराय का दरबार, आदिकुमार का विवाह, नाभिराय का वैराग्य, आदिकुमार राज्याभिषेक, मुकुटबद्ध राजाओं द्वारा भेंट समर्पण, ब्राह्मी सुन्दरी को शिक्षा संस्कार, नीलांजना नृत्य की प्रस्तुति, भरत बाहुबलि को राज्यपाट सौंपना, दीक्षा वन की ओर प्रस्थान, दीक्षा विधि अंकन्यास संस्कारोपण पूजन सहित अनेक मांगलिक क्रियाएं होंगी। इसके उपरान्त मुनि श्री का वैराग्यपद उपदेश होगा।













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