धर्मसभा में आचार्य श्री विहसंत सागर महाराज ने कहा कि हमें भगवान की पूजन अष्ठ द्रव्य से करनी चाहिए और हमें मंदिर में तीन बार परिक्रमा देते समय देव स्तुति बोलनी चाहिए। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
डबरा। चातुर्मासिक धर्म सभा में आरोग्यमय वर्षायोग समिति द्वारा आचार्य विराग सागर जी मुनिराज का चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन करके बड़े ही भक्ति भाव से किया गया। इसके बाद मेडिटेशन गुरु उपाध्याय श्री 108 विहसंतसागर जी महाराज की सभी भक्तों ने अष्ट द्रव्य से पूजा अर्चना की। उसके पश्चात गुरुदेव ने भक्तामर की कक्षा में मुनिवर ने कहा कि हे त्रिलोकीनाथ !
जिस प्रकार राजा के आधीन रहने वालों को घुमाने से कौन रोक सकता है? उसी प्रकार आपके आश्रित रहने वाले प्राणियों को संसार में इच्छानुसार विचरने से कौन रोक सकता हैं ? अर्थात् कोई नहीं! दोपहर कालीन विशेष बाल संस्कार पाठशाला का आयोजन किया गया, जिसमें मुनिराज ने बताया कि पूजन के आठ द्रव्य होते हैं।

हमें भगवान की पूजन अष्ठ द्रव्य से करनी चाहिए और हमें मंदिर में तीन बार परिक्रमा देते समय देव स्तुति बोलनी चाहिए। हमें भगवान के सामने पांच बार चावल, जिनवाणी के सामने चार बार चावल और मुनियों के पास तीन बार चावल चढ़ाने चाहिए।
जेसीआई ग्रुप डबरा अध्यक्ष अभिषेक गुप्ता, शुभम जैन, दीपक जैन बिट्टू, शीतल जैन, विक्रम जैन, हिमांशु सेठ, संदीप कुचिया, गुप्ता इलेक्ट्रॉनिक्स आदि ने परिवार सहित सदस्यों ने उपस्थित होकर गुरुदेव को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया।













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