घर, गाड़ी, संतान, धन, संतान और आय आदि के मामले में हमेशा खुश रहना चाहिए लेकिन ज्ञान के मामले में कभी भी संतुष्ट नहीं होना चाहिए।
Author - संपादक
![]()
अच्छे आचरण से दुखों से मुक्ति मिलती है, विवेक से अज्ञानता खत्म की जा सकती है और जानकारी से भय को दूर किया जा सकता है।
बुरे समय में भी धैर्य और आत्मविश्वास नहीं खोना चाहिए। दोनों गुण होने से मनुष्य विषम परिस्थितियों से निकलने में भी सक्षम रहता है।
फूलों की सुगंध केवल उसी दिशा में महकती है, जिस दिशा में हवा चल रही होती है। जबकि इंसान के अच्छे गुणों की महक चारों दिशाओं में स्वतः ही फैल जाती है।
न्यूज सौजन्य- राजकुमार अजमेरा झुमरी तिलैया (कोडरमा)। झारखंड सरकार के राजकीय अतिथि सम्मान प्राप्त जैन संत गुरुदेव मुनि 108 श्री विशल्य सागर जी ने अपनी अमृतवाणी...
त्रिदिवसीय कार्यक्रम के साथ चातुर्मास मंगलकलश स्थापना समारोह सम्पन्न न्यूज सौजन्य- सुनील जैन संचय,ललितपुर विदिशा (मप्र) । परम पूज्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी...
ज्ञानी पुरुष आर्थिक संपत्ति के बगैर भी अत्यंत धनी होते हैं क्योंकि ज्ञान और संतत्व रूपी रत्नों की कीमत कभी कम नहीं होती।
न्यूज सौजन्य- अंकित जैन गाजियाबाद। धर्मनगरी गाजियाबाद में बुधवार 13 जुलाई को परमपूज्य जिनागम पंथ प्रवर्तक भावलिंगी संत आचार्यश्री 108 श्री विमर्शसागर जी...
न्यूज सौजन्य- राजेश जैन दद्दू इंदौर। ‘आपका जीवन इसलिए अस्त-व्यस्त है क्योंकि आपका अपने जीवन के प्रति शुभ भाव नहीं हैं। जिन्होंने स्वभाव की प्राप्ति कर...








