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उपाध्याय मुनि श्री विशेष सागर जी महाराज ससंघ का मंगल प्रवेश: समाजजनों ने अगवानी कर लिया आशीर्वाद 


उपाध्याय श्री विशेष सागर जी महाराज ससंघ (3पिच्छी) का मंगल प्रवेश हुआ। प्रातः 7.30 बजे खंडवा की ओर से हुआ। समाजजनों ने मंगल अगवानी के लिए ढकलगांव फाटा खंडवा रोड पर पहुंचे। धर्म प्रभावना में सहयोगी बने। यहां आने के बाद उनकी देशना हुई। शाम को सिद्धवरकूट की ओर विहार हुआ। सनावद से पढ़िए सन्मति जैन काका की यह खबर…


सनावद। धर्म और वैराग्य के पथ पर त्यागियों की नगरी में साधुओं का निरंतर मंगल प्रवेश हो रहा है। सोमवार को गणाचार्य श्री विरागसागर जी महाराज के शिष्य उपाध्याय श्री विशेष सागर जी महाराज ससंघ (3पिच्छी) का मंगल प्रवेश हुआ। प्रातः 7.30 बजे खंडवा की ओर से हुआ। समाजजनों ने मंगल अगवानी के लिए ढकलगांव फाटा खंडवा रोड पर पहुंचे। धर्म प्रभावना में सहयोगी बने। मुनिश्री सुपार्श्वनाथ मंदिर पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन बड़ा जी के दर्शन किए। श्री शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय में सुबह 8 बजे से मुनि संघ की मंगल देशना हुई। जिसमें सर्वप्रथम मुनि श्री के संघस्थ ब्रा.ब्रह्मचारी चीकू भईया ने मंगला चरण किया। उपाध्याय मुनि श्री विशेष सागर जी महाराज ने अपने उदबोधन में कहा कि आप की नगरी सनावद संतों की नगरी है। यहां से एक नहीं दो नहीं पूरे 18 संतों ने अपना आत्म कल्याण का रास्ता प्रशस्त किया है। जब हम किसी साधु संतों के पास जाते हैं तो आप के नगर की पहचान वात्सल्य के मूरत आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के नाम से होती है। यह भूमि सिद्ध भूमि कहलाने लग गई। साधु और श्रावक एक गाड़ी के दो पहिए हैं। साधु श्रावक के बिना अपने धर्म का पालन नहीं कर सकते। अपने कर्तव्य का पालन नही ंकर सकते और श्रावक भी साधु के बिना अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं कर सकते। अंतर इतना है कि साधु साधना करते है और श्रावक उनकी साधना को सार्थक करने में सहायक होते हैं।

मुनिश्री का विहार सिद्धवरकूट की ओर हुआ 

मुनिश्री ने आचार्य श्री विराग सागर जी महाराज के समाधि मरण विस्तृत उल्लेख कर के समाधि का पूरा सार प्रस्तुत किया। प्रवचन के बाद 9.30 बजे मुनि संघ की आहारचर्या हुई। जिसमें आज मुनि संघ को आहार करवाने का सौभाग्य कैलाशचंद जटाले एवं किरण बाई लश्करे परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर मुकेश जैन रिंकेश जैन,राजू जैन, कांतिलाल जैन,नरेंद्र जैन काकू,प्रशांत जैन,नितेश जैन रजत जैन, वैभव सराफ आशीष जैन सहित सभीसमाजजन उपस्थित थे। शाम को मुनि संघ का मंगल विहार शाम को सिद्धवरकूट की ओर हुआ।

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