आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सहित 18 साधुओं की धर्म नगरी में वर्षायोग के लिए दो मुनिराजों का मंगल प्रवेश हुआ। आचार्य श्री विराग सागर जी और आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी और मुनिश्री साध्य सागर जी का मंगल प्रवेश बुधवार को प्रातः बड़वाह की ओर से हुआ। सभी समाजजनों ने ट्राइएंगल चौराहे पर पहुंचकर मुनिराजों की अगवानी की। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर…
सनावद। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सहित 18 साधुओं की धर्म नगरी में वर्षायोग के लिए दो मुनिराजों का मंगल प्रवेश हुआ। आचार्य श्री विराग सागर जी और आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के शिष्य मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी और मुनिश्री साध्य सागर जी का मंगल प्रवेश बुधवार को प्रातः बड़वाह की ओर से हुआ। सभी समाजजनों ने ट्राइएंगल चौराहे पर पहुंचकर मुनिराजों की अगवानी की।
महिला मंडलों की सदस्यों ने सिर पर मंगल कलश रखकर मुनिराजो की तीन प्रदीक्षणा लगाई। मुनिराजों का जुलूस नगर के प्रमुख मार्गाें से होते हुए श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर पहुंचा। जहां जुलूस का समापन हुआ। मुनिश्री के सानिध्य मंे जैनधर्म के 22वें तीर्थंकर श्री नेमिनाथ जी के मोक्ष कल्याणक दिवस पर लाडू चढ़ाया गया। द्वय मुनिराजों पर रजतमय छत्री सभी समाजजनों ने क्रम-क्रम से लगाई। जुलूस समापन के बाद आचार्यश्री शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय में धर्मसभा का शुभारंभ हुआ। जहां सर्वप्रथम आचार्य विराग सागर जी के चित्र के समक्ष द्वय मुनिराजांे के मंगल विहार में सारथी रहे समाजजनों ने दीप प्रज्वलन किया।मंगलाचरण संगीता पाटोदी ने किया। अगली कड़ी में द्वय मुनिराजों को नगर में चातुर्मास की स्वीकृति के लिए समाज के सभी संस्थाओं के साथ सभी समाजजनों ने श्रीफ़ल समर्पित कर निवेदन किया।
मुनि बन गए तो ऐसा मत समझना भगवान बन गए
मुनिश्री साध्य सागर जी ने अपनी देशना में कहा कि आचार्य वर्धमान सागर जी की नगरी में आना हमारे लिए बहुत गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि मैंने पारसोला में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के दर्शन से सीखा। पट्ट परंपरा से पंचम पट्टाचार्य परंपरा तक का वात्सल्य हमने आचार्यश्री में देखा। मुनि श्री ने कहा कि नहीं बन पाओ मुनिराज, नहीं बन पाओ माताजी लेकिन, जब भी माटी के पुतले में भी गुरुदेव विशुद्ध सागर कहते हैं भईया मुनि बन गए तो ऐसा मत समझना भगवान बन गए, मुनि भी बन गए हों तो अपने संयम का अपने अनुशासन का अपने ज्ञान का अपने ध्यान का अपने स्वाध्याय प्रतिक्रमण सामायिक का इतना ध्यान रखना जैसे एक मां अपने बच्चे का ख्याल रखती है। मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज ने कहा की निश्चित ही आप सभी भव्य आत्माओं ने पर्व पर्याय में पूर्णावृति बंध का आश्रव किया था।
आज वर्तमान में आप सभी लोग सभा में आए उन्हीं पुण्य का प्रभाव है। आप एक दो दिन नहीं चार महीने तक को अग्र वाणी सुनने का अवसर मिलेगा। यह प्रभु की वाणी ही आप की गति को पार लगाएगी। इस अवसर पर विश्वसूर्य सागर जी महाराज को आहारदान देने का सौभाग्य रेखा राकेश जैन परिवार एवं श्री साध्य सागर जी महाराज को आहारदान देने का सौभाग्य सावित्री भाई कैलाशचंद जटाले परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर सभी समाजजनों ने अपनी उपस्थिती दर्ज करवाई।













Add Comment