आर्यिका श्री विज्ञानमति माताजी ससंघ (7 पिच्छी) का शनिवार को ऐतिहासिक नगरी वर्द्धमानपुर (बदनावर) में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। संघ रतलाम से विहार करते हुए सातरूंडा मार्ग से शुक्रवार को मुलथान पहुंचा था। बदनावर से पढ़िए, ओम पाटोदी की यह खबर…
बदनावर। आर्यिका श्री विज्ञानमति माताजी ससंघ (7 पिच्छी) का शनिवार को ऐतिहासिक नगरी वर्द्धमानपुर (बदनावर) में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। संघ रतलाम से विहार करते हुए सातरूंडा मार्ग से शुक्रवार को मुलथान पहुंचा था। जहां रात्रि विश्राम के बाद प्रातःकालीन बेला में पैदल विहार करते हुए बदनावर पहुंचा। नगर में बैजनाथ मंदिर (उड़िया मंदिर) से चल समारोह के साथ संघ का स्वागत करते हुए उन्हें श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, जवाहर मार्ग लाया गया। यहां माताजी ससंघ ने भूगर्भ से प्राप्त प्राचीन जिनबिम्ब के दर्शन कर गहन भाव विभोरता व्यक्त की। वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी ने बताया कि महाकवि, दादागुरु आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज की परंपरा में जिनके प्रथम शिष्य समाधिस्थ आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज तथा द्वितीय शिष्य समाधिस्थ आचार्य कल्प श्री विवेकसागर जी महाराज रहे हैं,। उन्हीं की सुशिष्या आर्यिका श्री विज्ञानमति माताजी ससंघ का इस धर्मधरा पर आगमन जैन समाज के लिए अत्यंत हर्ष और सौभाग्य का विषय है।
इंदौर आगमन के लिए श्रीफल भेंट कर किया निवेदन
इस अवसर पर कालानी नगर इंदौर जैन समाज के सदस्य भी प्रातः बस द्वारा बदनावर पहुंचे और आर्यिका संघ के दर्शन का लाभ प्राप्त किया। उन्होंने माताजी ससंघ से इंदौर आगमन का भावपूर्ण निवेदन करते हुए श्रीफल भेंट किया। कार्यक्रम के दौरान वर्द्धमानपुर शोध संस्थान एवं दिगम्बर जैन समाज के सदस्यों ने बदनावर के प्राचीन इतिहास की जानकारी भी प्रस्तुत की।
इस अवसर पर राजेश मोदी, राजेश जैन फूलजी बां, ओम पाटोदी, स्वप्निल जैन, पवन पाटोदी, सुशील गोधा, रितेश मोदी, संजय गोधा, ललित गोधा, दिलीप मोदी, रोहन मोदी, संस्कार जैन, निखिल लुहाड़िया, नवीन अजमेरा, सौरभ जैन सहित अनेक समाजजन उपस्थित रहे। इंदौर समाज से अभय संघवी, जिनेन्द्र शिवपुरी, भविष्य शिवपुरी, रिंकू मेडिकल, सुनील बांझल, अरविंद दिवाकर भी विहार में सम्मिलित हुए।













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