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जिनवाणी सुरक्षा एवं सज्जा अभियान को मंगल आशीष: भावलिंगी संत श्रमणाचार्य श्री विमर्श सागर जी के सानिध्य में चल रहा अभियान 


भावलिंगी संत आचार्य श्री विमर्श सागर जी ससंघ के पावन सानिध्य में ‘जिनवाणी सुरक्षा एवं सज्जा अभियान’ के अंतर्गत श्री दिगंबर जैन महिला पंचान समिति, महिला समाज सहारनपुर के सौजन्य से ‘अहोभाग्य तीर्थ क्षेत्र’ वीर नगर जैन बाग में ‘सम्मान समारोह’ का मंगलमय वातावरण में आयोजन किया गया। सराहनपुर से पढ़िए, पारस जैन पार्श्वमणि की यह खबर…


सहारनपुर। भावलिंगी संत आचार्य श्री विमर्श सागर जी ससंघ के पावन सानिध्य में ‘जिनवाणी सुरक्षा एवं सज्जा अभियान’ के अंतर्गत श्री दिगंबर जैन महिला पंचान समिति, महिला समाज सहारनपुर के सौजन्य से ‘अहोभाग्य तीर्थ क्षेत्र’ वीर नगर जैन बाग में ‘सम्मान समारोह’ का मंगलमय वातावरण में आयोजन किया गया। धर्ममयी नगरी के 25 दिगंबर जैन जिनालयों में किए गए निरीक्षण का परिणाम घोषित कर 10 चल शील्ड शोरमियान, जानकी धाम, दीनानाथ, छत्ता बारूमल, मदनपुरी आदि जिनालयों की संयोजिकाओं को प्रदान की गई। सभी 25 जिनालयों की संयोजिका को अरुण कुमार जैन (कोषाध्यक्ष जैन समाज) एवं शशि जैन (शिरोमणि संरक्षिका) के सौजन्य से शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया। श्रुत पंचमी पर्व पर आयोजित अखिल भारतीय जिनवाणी सज्जा प्रतियोगिता, जिसमें 3671 संयोजिकाओं ने अपने जिनालयों की सज्जित जिनवाणी के फोटो भेजे थे। इसमें सहारनपुर की संयोजिका रीता जैन शोरमियान ने षष्टम एवं साधना जैन बड़तला यादगार ने नवम स्थान प्राप्त किया था। उन्हें भी भूषण स्वरूप मुकेश कुमार जैन चैरिटेबल ट्रस्ट मेरठ के सौजन्य से शील्ड से सम्मानित किया गया। संचालन डॉ. रेणु जैन (संस्थापिका जिनवाणी सुरक्षा एवं सज्जा अभियान, अध्यक्षा महिला समाज) ने किया। राकेश जैन (संरक्षक), राजेश जैन (अध्यक्ष) अनिल जैन सीए सभी ने डॉ. रेणु जैन अध्यक्षा, सरिता जैन महामंत्री, शोभा जैन कोषाध्यक्ष के कार्यों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

तीन लोक में यदि मां की संज्ञा है तो वह जिनवाणी को है

भावलिंगी संत आचार्य श्री विमर्श सागर जी महाराज की अमृतमयी वाणी ने सभी को आशीष प्रदान किया। आचार्य श्री ने कहा कि तीन लोक में यदि मां की संज्ञा है तो वह जिनवाणी को है। हम सब सन्तान है चाहे बेटा हो या बेटी, मुनिराज हो या आर्यिका, श्रावक हो या श्राविका-जिनवाणी माता बिना भेदभाव के सबको अमृत रस का रसपान कराती है। जिनवाणी सुरक्षा एवं सज्जा का छोटा सा चिंतन इतनी विशालता को प्राप्त हो गया है। 3671 संयोजिका व संयोजक एक साथ मिलकर मां जिनवाणी की सेवा का कार्य जिनवाणी सुरक्षा एवं सज्जा अभियान के अंतर्गत कर रहे हैं, मैं बहुत प्रफुल्लित हूं, आनंदित हूं आपके इस परिश्रम को देखकर। माता बहनें जब कुछ करने की ठान लेती हैं तो निश्चित रूप से वे अपने उस अभियान में अवश्य सफल होती हैं। जिनवाणी सुरक्षा एवं सज्जा अभियान एक भारतवर्षीय सकल दिगंबर जैन समाज को जोड़ने का बहुत सुंदर प्रयास है।

श्रावक, श्राविकाआंे तक पहुंचाएं-यह कल्याण का मार्ग होगा

यह अभियान पुण्यशाली जीवों की खोज है जिनकी पंचम काल में जिनवाणी में रुचि है। जिनवाणी की विनय करने से अपने कर्मों का क्षयोपशम होता है। एक मात्र जिनवाणी ही है जो हमारी उन्नति कर हमें संसार के दुखों से पार लगा सकती है। आचार्य श्री ने सभी के लिये संदेश दिया- शास्त्र विक्रय करना ज्ञानावरणी दर्शनावरणी कर्म के आश्रव बंध का कारण है। शास्त्रदान कहा गया है। शास्त्रों का प्रकाशन करें। वे शास्त्र सभी मुनि, आर्यिकाओं, श्रावक, श्राविकाआंे तक पहुंचाएं-यह कल्याण का मार्ग होगा। एक जिनागम पंथ पर चलते हुये मोक्षमार्गी बनो। अनाधि निधन जिनागम पंथ जयवन्त हो। जीवन है पानी की बूंद के रचयिता आचार्य श्री के मुख से भजन सुन सभी भाव विभोर हो गये । ‘जिनवाणी नित देती ज्ञान, जिनवाणी हरती अज्ञान जिनवाणी अवधारण से, श्रावक मुनि बनते भगवान जिनवाणी सुख-दुख का मार्ग बताए रे जीवन है पानी की बूंद कब मिट जाये रे , होनी अनहोनी कब क्या घट जाये रे।।’ जिनागम पंथ जयवंत हो तथा आचार्य श्री विमर्श सागर जी की जय-जयकार से आकाश गुंजायमान हो गया। जिनवाणी स्तुति के बाद सभा का विसर्जन हुआ।

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