अष्टान्हिका पर्व का आयोजन एम एस रोड स्थित भगवान महावीर धर्मस्थल में असम के राजकीय अतिथि आचार्य 108 श्री प्रमुख सागर ससंघ के सान्निध्य में किया जा रहा है। इस अवसर पर अनेक धार्मिक क्रियाएं आयोजित की जा रही हैं। पढ़िए सुनील कुमार सेठी की रिपोर्ट…
गुवाहाटी। श्री1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन अष्टान्हिका पर्व में करने की परंपरा जैन समाज में हजारों वर्षों से चली आ रही है। इसी क्रम में आगामी 4 जुलाई तक होने वाले अष्टान्हिका पर्व का आयोजन एम एस रोड स्थित भगवान महावीर धर्मस्थल में असम के राजकीय अतिथि आचार्य 108 श्री प्रमुख सागर ससंघ के सान्निध्य में किया गया। समारोह आचार्य श्री के 50 वें अवतरण दिवस के उपलक्ष्य पर जबलपुर से आमंत्रित संगीतकार प्रीति जैन एवं पार्टी द्वारा संगीतमय लहरों के साथ तथा बम्बई से आमंत्रित विधानाचार्या बा.ब्र.रचना दीदी, आचार्य श्री की संघस्थ बा.ब्र.बीना दीदी एवं स्थानीय पंडित संतोष कु. शास्त्री के निर्देशन में आयोजित किया जा रहा है।

जिसमें सभी भक्तगण अत्यंत भक्ति-भाव से सिद्धों की आराधना करते हुए अपने जीवन को सार्थक कर रहे हैं। इस अवसर पर झंडारोहण करने का सौभाग्य झूमर मल पन्नालाल गंगवाल (सपरिवार) को प्राप्त हुआ। तत्पश्चात मंडप उदघाटन करने का सौभाग्य जय कुमार – दीपक कुमार कासलीवाल (सपरिवार) को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य विनोद कुमार – रेखा देवी पहाड़िया को प्राप्त हुआ। कुबेर इंद्र बनने का सौभाग्य विनोद कुमार – चेलना देवी काला को प्राप्त हुआ। ईशान इंद्र बनने का सौभाग्य नेमीचंद- चंद्रकला देवी छाबड़ा को प्राप्त हुआ। महेंद्र बनने का सौभाग्य नरेंद्र कुमार- अनीता देवी गंगवाल को प्राप्त हुआ।

सनत कुमार इंद्र बनने का सौभाग्य स्वरूप चंद -राजुल देवी सेठी को प्राप्त हुआ। यज्ञ नायक बनने का सौभाग्य महेंद्र कुमार उषा देवी पांड्या को प्राप्त हुआ है। कार्यक्रम के प्रथम दिन उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधन करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि अष्टान्हिका पर्व व्रत, संयम का पर्व है। इन दिनों धारण किया गया संयम कई गुणित फल प्रदान करने वाला होता है। उन्होंने कहा कि पाप कार्यों से बचने हेतु धारण किया गया संयम विशेष फलदायी होता है। यह जानकारी समाज के प्रचार प्रसार विभाग के मुख्य संयोजक ओम प्रकाश सेठी एवं सह संयोजक सुनील कुमार सेठी ने दी।













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