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आर्यिका श्री विदुषीश्री माताजी ससंघ हुआ नगर में मंगल प्रवेश: आर्यिका संघ ने मंदिरों में दर्शन कर उद्बोधन दिया


आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज की ुशिष्या आर्यिका श्री विदुषीश्री माताजी ससंघ (5 पिच्छी) का मंगल प्रवेश सनावद में हुआ।समाजजनों ने खंडवा रोड पर पहुंचकर आर्यिका संघ की मंगल अगवानी की। आर्यिका संघ ने मंदिरों में दर्शन कर उद्बोधन दिया। मुनियों के भी प्रवचन हुए। सनावद से पढ़िए सन्मति काका की यह खबर…


सनावद। संतों की नगरी में साधुओं का निरंतर आना बड़े सौभाग्य की बात है। मंगलवार सुबह आचार्य श्री विरागसागर जी महाराज की ुशिष्या आर्यिका श्री विदुषीश्री माताजी ससंघ (5 पिच्छी) का मंगल प्रवेश हुआ। सभी समाजजनों ने खंडवा रोड पर पहुंचकर आर्यिका संघ की मंगल अगवानी की। आर्यिका संघ ने नगर में प्रवेश के सुपार्श्वनाथ मंदिर एवं श्री पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर के दर्शन किए। जहां विराजमान मुनि श्री प्रणेयसागर जी महाराज ससंघ एवं मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज के दर्शन कर उनके पाद प्रक्षालन किए। अगली कड़ी में संत भवन में सर्वप्रथम भगवान महावीर स्वामी के चित्र के समक्ष अरविंद कुमार जैन, सत्येंद्रकुमार जैन, हेमचंद पाटोदी द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया एवं मुनि श्री को शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य चंचला बाई जैन एवं संगीता पाटोदी को प्राप्त हुआ। आर्यिका माताजी द्वारा गुरु पूजन किया गया।

इस अवसर पर आर्यिका विदुषी श्री माताजी ने उद्बोधन में कहा कि जितना भी समय आप को मिला। उसमें इतना डूब जाना। करोड़ों भव के पाप आप के नष्ट हो जाएं और नष्ट होकर एक दिन ऐसा आए कि आप गुरुदेव के चरणों में बैठक कर उनकी वंदना पूजा-अर्चना कर भगवान बनने की भावना भा लेना। आप का भव पार हो जाएगा।

साधुओं के प्रति हमारा इतना लगाव होना चाहिए कि… -अंतर्मुखी पूज्य सागर जी महाराज 

अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर जी महाराज ने कहा कि साधुओं के प्रति हमारा इतना लगाव होना चाहिए। साधु के गुणों के प्रति मैत्री का भाव होना चाहिए। क्योंकि, हमारी दृष्टि पर निर्भर करता है कि हमने किस दृष्टि से अरिहंत को, सिद्ध को, साधु को, आचार्य को और उपाध्याय को देखा है। मुनिश्री प्रणेय सागर जी महाराज ने कहा कि आज का दिन बहुत ही शुभ है। आज के दिन आप को चतुर्विद संघ के दर्शन हो रहे है। आज यहां मुनिराज, माताजी, श्रावक श्राविकाएं उपस्थित हैं। मुनिश्री ने कहा कि अपने भावों की इतनी विशुद्धि रखो कि प्रत्येक क्षण इतना भाव विशुद्ध रखो कि मेरी गति बदले दुर्गति में ना बदले। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित रहे।

आर्यिका संघ का हुआ मंगल विहार

.आर्यिका श्री विदुषीश्री माताजी ससंघ (5 पिच्छी) का मंगल विहार शाम को सिद्धवरकूट की ओर हुआ। रात्रि विश्राम भोगांवा में हुआ एवं बुधवार प्रातः मंगल प्रवेश सिद्धवरकूट में होगा।

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