नगर में चातुर्मास रत गणिनी आर्यिका सरस्वती माताजी ससंघ के सानिध्य मे बड़े मन्दिर के सामने नव निर्मित वर्धमान देशना संत निलय में 8 सितंबर भाद्रपद शुक्ल की पंचमी से 17 सितंबर चतुर्दशी तक यह पर्व मनाया जायेगा। 18 सितंबर को सामूहिक क्षमा वाणी पर्व मनाया जाएगा। पढ़िए यह रिपोर्ट…
सनावद। पर्युषण पर्व जैनों का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व बुरे कर्मों का नाश करके हमें सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। भगवान महावीर के सिद्धांतों को ध्यान में रखकर हमें निरंतर और खासकर पर्युषण के दिनों में आत्म साधना में लीन होकर धर्म के बताए गए रास्ते पर चलना चाहिए। पर्युषण का अर्थ है परि यानी चारों ओर से, उषण यानी धर्म की आराधना। सन्मति जैन काका ने बताया कि नगर में चातुर्मास रत गणिनी आर्यिका सरस्वती माताजी ससंघ के सानिध्य मे बड़े मन्दिर के सामने नव निर्मित वर्धमान देशना संत निलय में 8 सितंबर भाद्रपद शुक्ल की पंचमी से 17 सितंबर चतुर्दशी तक यह पर्व मनाया जायेगा।
18 सितंबर को सामूहिक क्षमा वाणी पर्व मनाया जाएगा। 10 दिनों तक प्रतिदिन मंदिर जी में प्रातः पंचामृत अभिषेक संगीतमय पूजन तत्पश्चात माताजी के मंगल प्रवचन व दोपहर में तत्त्वार्थसूत्र की कक्षा व शाम को प्रतिक्रमण आनंद की यात्रा, भक्तिमय आरती, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।













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