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शीतल तीर्थ पर धूमधाम से हुआ अमृत महोत्सव : मेरे जीवन का मंगलाचरण आचार्यश्री योगीन्द्र सागर जी से हुआ: मुनि विनत सागरजी


धामनोद स्थित जैन धर्म स्थल शीतल तीर्थ रतलाम में पंचकल्याणक महोत्सव के प्रथम वार्षिकोत्सव का दो दिवसीय आयोजन सोमवार को गुरु गुणानुवाद सभा के साथ संपन्न हुआ। पढ़िए धामनोद(रतलाम) से यह खबर…


 धामनोद (रतलाम)। किसी ने कहा कि गुरुदेव ने मेरा उद्धार कर दिया। किसी ने कहा कि गुरुदेव के आशीष से मेराअमुक काम बन गया। किसी ने कहा कि गुरुदेव की वाणी से यह चमत्कार हो गया लेकिन, गुरुदेव योगीन्द्र सागर जी की गुणानुवाद सभा में सबको आश्चर्य चकित करते हुए मुनिश्री विनत सागर जी ने कहा कि मेरे तो जीवन का मंगलाचरण ही श्री योगीन्द्र सागर जी से हुआ है। धामनोद स्थित जैन धर्म स्थल शीतल तीर्थ रतलाम में पंचकल्याणक महोत्सव के प्रथम वार्षिकोत्सव का दो दिवसीय आयोजन सोमवार को गुरु गुणानुवाद सभा के साथ संपन्न हुआ। क्षेत्र अधिष्टात्री डॉ.सविता दीदी ने बताया कि रविवार को महामस्तकाभिषेक के बाद सोमवार को सुबह नित्याभिषेक के साथ ही दीपक गोधा परिवार ने श्री ऋषि मंडल विधान का पुण्यार्जन किया।

दूर-दूर से आए गुरु भक्त रहे उपस्थित

दोपहर में गुरु भक्तों की उपस्थिति में गुरु गुणानुवाद सभा का आयोजन हुआ। जिसमें मुनिश्री विनत सागर जी एवं आर्यिका श्री विकाम्या श्री माताजी ससंघ का मंगल सानिध्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में अतिथि के रूप में पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी, डॉ.अनुपम जैन इंदौर, हंसमुख गांधी इंदौर, पुखराज सेठी जावरा, महेंद्र जैन गुड़वाला कोटा, सचिन काला पुणे सहित कई गुरु भक्त उपस्थित रहे।

तीर्थ पर ही उपस्थित हैं श्री योगीन्द्र सागरजी

इसी अवसर पर आर्यिका विगुंजन श्री ने अपनी भावांजलि में कहा कि मैंने बहुत छोटी उम्र में आचार्य श्री योगीन्द्र सागर के दर्शन किए थे। तबकी स्मृतियां तो धुंधली है लेकिन, अपने गुरु के साहित्य में जब पूज्य गुरुदेव का वर्णन पड़ा तो ऐसे व्यक्तित्व की गाथा से में बहुत प्रभावित हुई। आर्यिका विकाम्या श्री माताजी ने कहा कि लोग कहते है कि योगीन्द्र सागर जी अब नही है पर मेरा मानना है कि वो आज भी अपनी सर्व सिद्धियों के साथ शीतल तीर्थ पर ही उपस्थित हैं।जिसका साक्षात्कार मैंने इन दो दिवसों में स्वयंअनुभूत किया।

एलक दीक्षा होते ही उनके दर्शन प्राप्त हुए

इसी अवसर पर मुनि विनत सागर जी ने कहा कि मेरे तो जीवन का मंगलाचरण ही श्री योगीन्द्र सागर जी से हुआ है। पहली बार दर्शन में ही मैंने संयम मार्ग को श्रेष्ठ माना और दूसरी बार एलक दीक्षा होते ही उनके दर्शन प्राप्त हुए और फिर में संयम की अगली सीढ़ी की ओर आगे बढ़ा। कार्यक्रम का संचालन राकेश जैन ‘चपलमन’ ने किया।

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