जैन साधक क्षपक चितानंद जी (ब्र. राजेंद्र जैन दनगसिया) अजमेर की संल्लेखना आचार्य श्री समयसागर महाराज के ससंघ सान्निध्य एवं कुशल निर्देशन में जारी है। उनकी संल्लेखना समाधि का सातवां दिन है। क्षपक चितानंद जी पूर्ण चेतना अवस्था में संल्लेखना की साधना कर रहे हैं। अजमेर से मनोज जैन नायक की यह खबर…
अजमेर। जैन साधक क्षपक चितानंद जी (ब्र. राजेंद्र जैन दनगसिया) अजमेर की संल्लेखना आचार्य श्री समयसागर महाराज के ससंघ सान्निध्य एवं कुशल निर्देशन में जारी है। उनकी संल्लेखना समाधि का सातवां दिन है। क्षपक चितानंद जी पूर्ण चेतना अवस्था में संल्लेखना की साधना कर रहे हैं। आचार्य श्री समयसागरजी महाराज, मुनिश्री संभव सागरजी महाराज एवं समस्त मुनिसंघ का निरंतर संबोधन चल रहा है। ब्रह्मचारीजी पूर्ण चेतना से मजबूती के साथ मोक्षमार्ग पर आरूढ़ हैं। ब्र. चिदानंदजी (पूर्व नाम ब्र. राजेंद्र कुमार दनगसिया) ने 1987 में ब्रह्मचर्य व्रत लिया था। आपने आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से 1999 में 7 प्रतिमा का व्रत और 2013 में 10 प्रतिमा का व्रत लिया था। 2011 से शाम के जल का त्याग एवं शक्कर का आजीवन त्याग कर दिया एवं 2013 से नमक का भी त्याग किया था।
साधक ब्रह्मचारी राजेंद्र जैन ने अपने जीवन के अंतिम समय में संयम मार्ग को स्वीकार करते हुए संल्लेखना व्रत ग्रहण किया है। आचार्यश्री 108 विद्यासागर महाराज के परम आराधक राजेंद्र जैन दनगसिया ने 45 वर्ष की अल्पायु में गुरुदेव से ब्रह्मचर्य व्रत लेकर संयम के साथ अपना जीवन निर्वहन कर रहे हैं। श्री जैन अपने गुरु आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज को भगवन स्वरूप मानते थे। परिवार के साथ रहकर भी वे अगाध श्रद्धा के फलस्वरूप जैन दर्शन और जैन सिद्धांतों का पूर्णतः पालन करते हुए संयम की साधना में लीन रहे। दिगम्बर जैसवाल जैन उपरोचिया परिवार अजमेर के श्रावक श्रेष्ठी ब्रह्मचारी राजेंद्र जैन ने अपना अंतिम समय निकट समझते हुए जबलपुर में विराजमान आचार्यश्री समयसागर जी महाराज को श्रीफल भेंटकर संल्लेखना हेतु निवेदन किया। गुरुदेव ने राजेंद्र जैन की भावना को देखते हुए उन्हें आजीवन गृह त्याग कराकर दस प्रतिमाओं के व्रत देकर क्षपक चिंतानंद जी नामकरण किया।
गुरुदेव के निर्देशानुसार क्षपक चिंतानंद (राजेंद्र दनगसिया) ने सभी प्रकार के आहार का त्याग कर दिया है। संयम की साधना में लीन श्री राजेंद्र जी जैन का पूरा परिवार, उनके पुत्र अजय जैन दनगसिया, विजय जैन, पुत्रबधु साधना जैन एवं सविता जैन निरंतर यहां ब्रम्हचारी चिदानंदजी (पूर्व नाम ब्र. राजेन्द्र कुमारजी दनगसिया) अजमेर की पूर्णभाव से वैयावृति में लीन हैं। सभी की मंगल भावना है कि ब्रह्मचारी राजेंद्र जैन दनगसिया को उनकी भावना के अनुरूप लक्ष्य की प्राप्ति हो।













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