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निर्यापक श्रमण मुनिश्री प्रशांत सागर जी महाराज का समाधिमरण: आचार्य विद्यासागर जी महाराज के शिष्य थे प्रशांत सागर जी


आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री प्रशांत सागर जी महाराज जी की समाधि हो गई । सिद्धक्षेत्र श्री चम्पापुर पर पिछली रात्रि यह जानकारी आई कि मुनिश्री ने समाधि ले ली है । ज्यादा जानकारी सहयोगी राजेश जैन दद्दू की रिपोर्ट में


पूज्य मुनिश्री ससंघ श्री सम्मेद शिखर जी की यात्रा उपरांत निकटतम सिद्धक्षेत्रों और तीर्थों की वंदना हेतु प्रवास पर थे । सिद्धक्षेत्र श्री चम्पापुर पर पिछली रात्रि उन्होनें समाधि ले ली ।

जानिए मुनि श्री प्रशांत सागर जी का व्यक्तित्व,कृतित्व

आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य समाधिस्थ मुनि श्री प्रशांतसागर महाराज नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में 3 जनवरी 1961 को उनका जन्म हुआ था। बीकॉम प्रथम वर्ष तक शिक्षित थे। गृहस्थ अवस्था में उनका नाम राजेश जैन था पिता देवचंद जैन और माता सुशीला जैन के सात बच्चों में उनका क्रम चौथा था। उन्होंने18 फरवरी 1989 को ब्रह्मचर्य व्रत लिया था ।

मुनि श्री की क्षुल्लक दीक्षा 16 मई 1991 को मुक्तागिरी में हुई थी तथा ऐलक दीक्षा भी 25 जुलाई 1991 को मुक्तागिरी में ही हुई थी। मुनि दीक्षा 16 अक्टूबर 1997 शरद पूर्णिमा के दिन सिद्धोदय सिद्धक्षेत्र नेमावर में हुई । मुनि श्री प्रशांतसागर और मुनि श्री निर्वेगसागर महाराज ससंघ सम्मेद शिखरजी सिद्ध क्षेत्र की वंदना कर पंचतीर्थ वंदना कर रहे थे इसी दौरान चंपापुर में उनकी समाधि हो गई।

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