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जम्बूस्वामी तपोस्थली बोलखेड़ा पर हुए एक पंथ तीन काज : द्वय नवीन मुनि जेनेश्वरी दीक्षा व उपाध्याय पद के आचार्य वसुनंदी ने दिए संस्कार


श्रावकों से खचाखच भरे सभागार में आचार्य वसुनंदी महाराज ने द्वय मुनियों को दीक्षा प्रदान करते हुए ऐलक विवेकानंद महाराज को मुनि ध्रुवानंद महाराज, क्षुल्लक भरत सागर को धैर्यानन्द महाराज नाम प्रदान किया। वहीं मुनि ज्ञानानंद महाराज व मुनि जिनानंद महाराज को चतुर्थ परमेष्ठी उपाध्याय के संस्कार आचार्य ने प्रदान किये तो नवीन नामकरण भी किया गया। पढ़िए मनोज नायक की रिपोर्ट…


बोलखेड़ा कामां। पद के प्रति आसक्ति नहीं, विरक्ति रखते हुए मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होना चाहिए। निर्लोभता के साथ पद ग्रहण करते हुए कर्तव्य का निर्वाह करना और सुयोग्य शिष्य को पदभार देकर समाधि को प्राप्त करना ही एक श्रमण का कर्तव्य होना चाहिए। यह उद्गार जम्बूस्वामी तपोस्थली बोलखेड़ा पर आयोजित बृहद समारोह में आचार्य वसुनंदी महाराज ने व्यक्त किये।

अनुपम वात्सल्य का उदाहरण

तपोस्थली के प्रचार प्रभारी संजय जैन बड़जात्या के अनुसार तपोस्थली पर आयोजित आचार्य पदारोहण व उपाध्याय पद संस्कार व द्वय मुनि दीक्षा समारोह का एक पंथ तीन काज का आयोजन हुआ। आयोजन समिति के रमेशचंद्र गर्ग,अरुण जैन बंटी, किशोर जैन डीग द्वारा अथितियों का अभिनंदन किया तो मुनि प्रज्ञानंद, मुनि शिवानंद, मुनि प्रशमानंद, मुनि पवित्रानंद महाराज ने आचार्य के प्रति विनियांजली देते हुए कहा कि आचार्य वसुनंदी महाराज का शिष्यों और भक्तों के प्रति अनुपम वात्सल्य है।

द्वय दिगम्बर मुनि दीक्षा की प्रदान

श्रावकों से खचाखच भरे सभागार में आचार्य वसुनंदी महाराज ने द्वय मुनियों को दीक्षा प्रदान करते हुए ऐलक विवेकानंद महाराज को मुनि ध्रुवानंद महाराज, क्षुल्लक भरत सागर को धैर्यानन्द महाराज नाम प्रदान किया। भरी ठंड में मुनियों के दिगंबर होते ही उपस्थित समुदाय ने वैराग्य की अनुमोदना करते हुए आश्चर्य व्यक्त किया।

द्वय उपाध्याय पद के दिये संस्कार

कार्यक्रम के तीसरे चरण में मुनि ज्ञानानंद महाराज व मुनि जिनानंद महाराज को चतुर्थ परमेष्ठी उपाध्याय के संस्कार आचार्य ने प्रदान किये तो नवीन नामकरण भी किया गया। मुनि ज्ञानानंद का उपाध्याय वृषभानद महवराज एवं मुनि जिनानंद महाराज को उपाध्याय विज्ञानंद महाराज नाम प्रदान किया गया। कार्यक्रम में दूर दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे तो संपूर्ण सभागार जैन धर्म के जयकारों से गुंजायमान हो गया।

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