राजस्थान सरकार द्वारा टोंक में चातुर्मासरत जैनाचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज को राजकीय अतिथि घोषित किए जाने से जैन समाज में हर्ष का वातावरण है। संयम साधना के 57वें वर्ष में प्रविष्ट आचार्य श्री की यह मान्यता समाज के प्रति राज्य का सम्मान है। पढ़िए राजेश पंचोलिया इंदौर की खास रिपोर्ट…
टोंक। प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के पंचम पट्टाधीश, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज वर्तमान में टोंक नगर में 35 साधुओं सहित चातुर्मास में प्रविष्ट हैं। संयम साधना जीवन का यह उनका 57वां वर्ष है।
आचार्य श्री का जन्म वर्ष 1950 में श्री यशवंत जी के रूप में हुआ था। उन्होंने 24 फरवरी 1969 को आचार्य श्री धर्मसागर जी से मुनि दीक्षा लेकर मुनि वर्धमान सागर जी के रूप में संयम जीवन प्रारंभ किया। तत्पश्चात, चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजीतसागर जी के आदेशानुसार 24 जून 1990 को उन्हें आचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया गया।
अब, राजस्थान शासन ने पत्र दिनांक 4 अगस्त 2025 के अनुसार उन्हें राजस्थान का राजकीय अतिथि घोषित कर दिया है, जिससे समाज में अपार हर्ष व्याप्त है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 में भी उन्हें तत्कालीन सरकार द्वारा यही सम्मान प्रदान किया गया था।
117 भव्य जीवों को संयम दीक्षा दे चुके हैं
आचार्य श्री के पावन सानिध्य में कई ऐतिहासिक आयोजन संपन्न हुए हैं — जिनमें 1008 श्री बाहुबली भगवान के महामस्तकाभिषेक वर्ष 1993, 2006 और 2018 में तथा श्री महावीर स्वामी जी का महामस्तकाभिषेक वर्ष 2022 में महावीरजी क्षेत्र में प्रमुख हैं। आप अब तक 117 भव्य जीवों को संयम दीक्षा दे चुके हैं, जो आपकी साधना और प्रेरणा की अनुपम उपलब्धि है। इस ऐतिहासिक निर्णय पर जैन समाज के अध्यक्ष, महामंत्री एवं चातुर्मास समिति के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री, सांसद, जिला पंचायत प्रमुख बंसल व अन्य जनप्रतिनिधियों के प्रति आभार प्रकट किया है।













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