टोंक में आयोजित भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक पर्व पर आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज ने धर्मसभा में क्षमा, सम्यक दर्शन और मोक्ष के महत्व पर प्रवचन दिया। कार्यक्रम में पंचामृत अभिषेक, निर्वाण मोदक चढ़ाने और भक्ति नृत्य जैसे विविध आयोजन हुए। पढ़िए विकास जैन की पूरी रिपोर्ट…
टोंक। भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर टोंक नगर में आयोजित धर्मसभा में पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने मंगल देशना में कहा – मोक्ष ही परम सुख है, और क्षमा उस सुख का प्रवेश द्वार। उन्होंने कहा कि क्रोध जब लंबे समय तक रहता है तो बैर बन जाता है और यह बैर आत्मा को कई जन्मों तक दुःख देता है। वही आत्मा जो क्षमा, दया और साम्यभाव में जीती है, उसे उत्तम गति, उच्च जीवन और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।
आचार्य श्री ने धर्मसभा में पार्श्वनाथ भगवान के दस भवों का विवेचन किया और बताया कि मोक्ष एकमात्र उद्देश्य है जिसे हर आत्मा को अपनाना चाहिए। इसके पूर्व आदर्श नगर में श्रीजी का भव्य पंचामृत अभिषेक किया गया जिसमें 23 से अधिक पुण्यार्जक परिवारों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत श्रीजी, आचार्य शांतिसागर, वीरसागर, शिवसागर, धर्मसागर, अजीतसागर के चित्रों के अनावरण, दीप प्रज्वलन व आचार्य श्री के पादप्रक्षालन के साथ हुई। इसके बाद अष्टद्रव्य पूजन, भजन नृत्य एवं अर्घ्य समर्पण किए गए।
निर्वाण मोदक चढ़ाया
मोक्ष कल्याणक पर्व की खुशी में निर्वाण मोदक लाडू श्रीजी के चरणों में समर्पित किया गया। श्रेष्ठी टीकमचंद, श्यामलाल, धर्मचंद, लालचंद, आशीष कुमार फूलेता परिवार ने यह लाडू चढ़ाया। कार्यक्रम में समाज के प्रमुख लोगों की उपस्थिति रही, जिनमें शामिल थे –
पदमचंद आंडरा, विमल बरवास, अनिल आंडरा, रमेश काला, राजेश सर्राफ, मुकेश बरवास, नेमीचंद बनेठा, कमल सर्राफ, सुनील सर्राफ, एंजे दाखिया, नीटू छामुनिया, ओम ककोड़, अंकुर पाटनी, अनिल सर्राफ, सोनू पासरोटियां, पुनीत जागीरदार, विकास अतार, मनीष अतार, मनोज बहड़, आशु दाखिया, राहुल पासरोटियां, सोहम कंटान, लोकेश कल्ली, जीतू बनेठा आदि। धर्मसभा के सफल आयोजन में जैन धर्म प्रचारक पवन कंटान एवं विकास जागीरदार का विशेष योगदान रहा।













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