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आचार्य श्री विवेक सागर महाराज का चातुर्मास के लिए विहार: सीकर से किशनगढ़ तक संघ के साथ श्वान भी चल रहा, यह देख हर कोई कर रहा आश्चर्य 


हर कोई अचंभित है, चातुर्मास के लिए विहार कर रहे आचार्य श्री विवेक सागर महाराज के साथ पिछले तीन माह से एक श्वान भी संघ के साथ चल रहा है। पढ़िए एक रिपोर्ट…


अजमेर। हर कोई अचंभित है, चातुर्मास के लिए विहार कर रहे आचार्य श्री विवेक सागर महाराज के साथ पिछले तीन माह से एक श्वान भी संघ के साथ चल रहा है। यह श्वान सीकर स्थित जीण माता मंदिर से अब तक 350 किमी की यात्रा कर चुका है। आपको बता दें इन दिनों आचार्य श्री का विहार अजमेर की ओर चल रहा है।

जहां आचार्य श्री जाते हैं, वहीं जाता है 

जहां-जहां आचार्य श्री विवेक सागर महाराज जाते हैं, वहीं जाता है। वह जहां विराजमान होते हैं वहीं यह भी बैठ जाता है। वहां आसपास कोई गंदगी नहीं करता। यह श्वान जैन समाज में इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है।

दूध व रोटी ही खाता है 

आश्चर्य की बात यह है कि यह श्वान दूध व रोटी ही खाता है। बिस्किट, ब्रेड व टोस्ट नहीं खाता। रात को केवल दूध ही पीता है। उसका आहार देखकर भी लोगों को अचंभा हो रहा है। यह जीण माता मंदिर से साथ चल रहा है। पहले उसे हटाने का प्रयास भी किया गया, लेकिन वह नहीं हटा। जब आचार्य़श्री के लिए आहार की व्यवस्था की जाती है, तो समाज के लोग इस श्वान के लिए भी भोजन की व्यवस्था करते हैं। यह आचार्यश्री के विहार से पहले भोजन भी ग्रहण नहीं करता। जहां आचार्य श्री ठहरते हैं, वहीं बाहर बैठ जाता है। अंदर नहीं जाता। उसके यह भाव देखकर समाजजनों का कहना है कि जीवों में भी ईश्वर के प्रति प्रेम होता है। यह उसी का उदाहरण है।

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