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समाधि दिवस पर आचार्य श्री विराग सागरजी का पुण्य स्मरण: आचार्यश्री को कोटि-कोटि भावांजलि 


4 जुलाई 2024 को संल्लेखना पूर्वक समाधिस्थ हुए श्रमण संस्कृति के गणाचार्य विरागसागर जी महाराज का आज प्रथम पुण्य स्मरण दिवस है। समाधि दिवस पर हम उनका पुण्य स्मरण करते हुए कोटि-कोटि नमन करते हैं। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…


इंदौर। 2 मई 1963 को जन्मे और 4 जुलाई 2024 को संल्लेखना पूर्वक समाधिस्थ हुए श्रमण संस्कृति के गणाचार्य विरागसागर जी महाराज का आज प्रथम पुण्य स्मरण दिवस है। समाधि दिवस पर हम उनका पुण्य स्मरण करते हुए कोटि-कोटि नमन करते हैं। गणाचार्य विराग सागर जी कोई सामान्य संत नहीं थे, आपका भी आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज की तरह अपने आचार्यत्व को सफल करते हुए श्रमण परंपरा के उन्नयन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। डॉ. जैनेंद्र जैन और राजेश जैन दद्दू ने बताया कि आप एक उत्कृष्ट क्षयोपशम धारी शिरोमणि संत थे और आपने अपनी साधना काल के 45 वर्षों में ऐसे अनेक कीर्तिमान स्थापित किए।

जिसकी गौरव गाथा युगों-युगों तक इतिहास गाता रहेगा। उन्होंने बताया कि लगभग 550 शिष्य, प्रशिष्यों के नायक गणाचार्य विराग सागर जी निमित्तज्ञानी भी थे और अपनी समाधि का काल निकट जानकर एक दिन पूर्व ही उन्होंने अपने अंतिम उपदेश में सार्वजनिक रूप से स्व शिष्य, पर शिष्य, स्व गण,से पर गण से क्षमा याचना पूर्वक उत्तमार्थ प्रतिक्रमण कर आगम की व्यवस्था अनुसार अपने पद का भार एवं उत्तराधिकारी अपने शिष्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज’को दिए जाने की घोषणा करते हुए संघ का परित्याग कर दिया और पूर्ण निर्विकल्प होकर समाधि का एक अभूतपूर्व और सर्वश्रेष्ठ एवं उत्कृष्ट कीर्तिमान स्थापित कर समाधिस्थ हो गए। ऐसे श्रमण संस्कृति के श्रेष्ठ साधक के प्रथम पुण्य स्मरण दिवस पर कोटि-कोटि नमन। नमोस्तु शासन जयवंत हो।

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