श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन मे कहा कि बड़ों की विफलता पर छोटों को बहुत खुशी होती है। बड़े सफल नहीं हो रहे इस खबर को सुनकर नाच उठते हैं। उन्हें अपनी सफलता की चिंता नहीं रहती। छोटों की खुशी नई बात नहीं है। पढ़िए राजीव सिंघई की रिपोर्ट…
आगरा। श्रमण मुनिपुंगव तीर्थ चक्रवर्ती108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन मे कहा कि बड़ों की विफलता पर छोटों को बहुत खुशी होती है। बड़े सफल नहीं हो रहे इस खबर को सुनकर नाच उठते हैं। उन्हें अपनी सफलता की चिंता नहीं रहती। छोटों की खुशी नई बात नहीं है।
सुधरना – हम लोग ये सोचने लगते है कि आज तक जो नहीं हुआ वह अब क्या होगा। महाराजजी के प्रवचन आज तक समझ में नहीं आया तो अब क्या समझ मे आएगा। ये भाव लगाओ आज तक नही हुआ अब होने वाला है आज तक नहीं सुधरा तो अब निश्चित ही सुधरने वाला है। जो सुधरा है वह तो सुधरा है।
अतिशय-हम कुछ जानते नहीं, बताने वाला कोई नही है फिर भी हमें भगवान में साक्षात भगवान दिखता है। जबकि वह साक्षात पाषाण है। भक्त भगवान मान रहा है। ये भक्ति अतिशय दिखाएगी













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