भादवा सुदी दूज परम पूज्य आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज के समाधि दिवस पर नेमी नगर (जैन कालोनी) में विनयांजलि सभा में पूज्य मुनि श्री मुनिसागरजी जी महाराज ने मंगल प्रवचन में कहा चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांति सागर जी महाराज अदम्य शक्ति,दृढ़ आत्म बल के धरि थे। उन्होंने जैन धर्म की रक्षा की और आज मुनि परंपरा उन्हीं के कारण जीवित है। पढ़िए यह रिपोर्ट…
इंदौर। भादवा सुदी दूज परम पूज्य आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज के समाधि दिवस पर नेमी नगर (जैन कालोनी) में विनयांजलि सभा में पूज्य मुनि श्री मुनिसागरजी जी महाराज ने मंगल प्रवचन में कहा चारित्र चक्रवर्ती आचार्य शांति सागर जी महाराज अदम्य शक्ति,दृढ़ आत्म बल के धरि थे। उन्होंने जैन धर्म की रक्षा की और आज मुनि परंपरा उन्हीं के कारण जीवित है। उन्होंने यह भी कहा कि जीवन में सबसे पहले गुरु हमारे माता-पिता होते हैं और शिक्षक दिवस पर सभी शिक्षकों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि कि वह सभी बच्चों को धर्म नीति संबंधित शिक्षा अवश्य दें जिससे शुभ संस्कृति देश एवं अच्छे समाज की स्थापना हो सके।
इस अवसर पर आदरांजलि देते हुए किरण बड़जात्या, प्रतिभा अजमेरा, उर्मिला दोषी, मंजु पाटनी, गिरीश काला, गिरीश पाटोदी, कल्पना जैन तथा ब्र. मंजुला दीदी ने महाराज जी के कई रोचक प्रसंग, अनेकों घटनाएं तथा पूरे जीवन के ख़ास पहलू पर प्रकाश डाला और कहा कि आज हम जो मुनियों के दर्शन कर रहे हैं, वो सब शांतिसागर जी महाराज की ही देन है। आप प्रथम आचार्य थे।
दिगंबर जैन समाज नेमि नगर अध्यक्ष कैलाश लुहाड़िया ने बताया कि शिक्षक दिवस के अवसर पर पूज्य मुनि श्री मोन सागर जी, मुनि सागर जी, मुक्ति सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में नेमिनगर समाज के वरिष्ठ शिक्षकों महेन्द्र गंगवाल, प्रेमचंद वेद, मंजू पाटनी, शशि उत्तम चंद, पुष्पा लेखा, रेखा पापड़ीवाल, सुशीला चांदीवाल, डॉ नेमीचंद जैन का शाल श्रीफल, माला दुपट्टा पहना कर पवन गुना वाले, अनिल अजमेरा, माणक कासलीवाल, निर्मला पाटोदी, कुसुम गंगवाल, प्रमिला जैन उर्मिला दोषी कल्पना बाकलीवाल मधु जैन प्रतिभा अजमेरा किरण बड़जात्या, लवी जैन, संगीता सेठी, मंजु पापड़ीवाल आदि ने सम्मान किया। तत्पश्चात् गुरुदेव के प्रवचन हुए। संचालन कैलाश लुहाड़िया ने किया। आभार गिरीश पाटोदी ने माना।













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