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भारतगौरव गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के 73वें संयम दिवस एवं 91वीं जन्मजयंती पर अयोध्या में आयोजन : वर्तमान में आचार्य श्री शांतिसागर जी का प्रतिरूप हैं 90 वर्षीय गणिनी ज्ञानमती माताजी: प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी


पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी के रूप में हमें आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज का दर्शन मिलता है। माताजी ने अपने जीवन में अपने गुरु, प्रथमाचार्य चारित्र्य चक्रवर्ती श्री शांतिसागर जी महाराज के हर आदेश, संदेश और बातों को अंगीकार किया है। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…


अयोध्या। आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के बारे में क्या कहें? मेरा परम सौभाग्य है कि ऐसे चारित्र्य चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज का आचार्य पदारोहण शताब्दी वर्ष चल रहा है। सन 1924 में उन्हें समडोली, महाराष्ट्र में समाज ने आचार्य पद पर प्रतिष्ठापित किया था। वे बीसवीं शताब्दी के पहले आचार्य बने, जो हम सबके लिए दिगदिगन्त बने। आज भी, जब हम पूज्य गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के मुख से उनकी बातें सुनते हैं, तो ऐसा लगता है कि हमने आचार्य श्री शांतिसागर महाराज के साक्षात दर्शन कर लिए हैं।

पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी के रूप में हमें आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज का दर्शन मिलता है। माताजी ने अपने जीवन में अपने गुरु, प्रथमाचार्य चारित्र्य चक्रवर्ती श्री शांतिसागर जी महाराज के हर आदेश, संदेश और बातों को अंगीकार किया है। 1956 में माधोराजपुरा (राज.) में आचार्य श्री वीरसागर जी महाराज से दीक्षित होकर, माताजी पिछले 72 वर्षों से जैन धर्म का संदेश दे रही हैं। आज, जब माताजी 90 वर्ष की हो रही हैं, उन्होंने आचार्य शांतिसागर जी महाराज के संदेशों को पूरे विश्व में फैलाया है।

उनके प्रवचन में कभी भी ऐसा नहीं होता कि वे शांतिसागर जी महाराज की बात न करें या उनकी जयजयकार न करें। ऐसे शिष्यों का मिलना भी अनूठा है, जो अपने गुरु के गुरु को इस प्रकार से प्रभावित करते हैं कि देश भर में आदर्श गुरु परंपरा को प्राप्त किया जा सके। आचार्य शांतिसागर जी महाराज हमारे जैन समाज के आदर्श हैं। उनके मार्ग पर चलकर हमारे सभी संत, आर्यिका माताएं, और दिगंबर मुनि उनके बताए हुए मार्ग का पालन कर रहे हैं। हम आचार्य शांतिसागर जी महाराज को शत-शत नमन करते हैं। उनके आचार्य पदारोहण शताब्दी वर्ष की मिसाल हमारे लिए प्रेरणादायक हो। यह मंगल प्रार्थना है कि आने वाली पीढ़ियां भी उनके संदेशों पर चलते हुए जैन धर्म की पताका फहराते रहें और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती रहें।

भारतगौरव गणिनिप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के 73वें संयम दिवस एवं 91वीं जन्मजयंती पर माताजी के चरणों में शत-शत वंदन।

साभार,

राजेश जैन दद्दू

शब्दांकन – अभिषेक अशोक पाटील

(कार्याध्यक्ष – अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद, कोल्हापूर)

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