आचार्य शांति सागर जी महाराज शताब्दी महोत्सव के तहत शांति से समागम पत्रकार संगोष्ठी रविवार को हुई। इसका संयोजन जैन पत्रकार संघ के अध्यक्ष रमेश तिजारिया, महामंत्री उदय भान जैन ने किया था। कार्यक्रम में आचार्य वर्धमान महाराज ससंघ ने विगत 35 वर्षों की फाइल का अवलोकन किया। पत्रकार पारस जैन पार्श्वमणि ने बताया कि मेरा आलेख ‘मेरी भावना’ संपूर्ण भारतवर्ष की शिक्षण संस्थानों में लागू हो और प्रार्थना के रूप में बोली जाए। टोंक से पढ़िए, यह खबर…
टोंक। आचार्य शांति सागर जी महाराज शताब्दी महोत्सव के तहत शांति से समागम पत्रकार संगोष्ठी रविवार को हुई। इसका संयोजन जैन पत्रकार संघ के अध्यक्ष रमेश तिजारिया, महामंत्री उदय भान जैन ने किया था। कार्यक्रम में आचार्य वर्धमान महाराज ससंघ ने विगत 35 वर्षों की फाइल का अवलोकन किया। पत्रकार पारस जैन पार्श्वमणि ने बताया कि मेरा आलेख ‘मेरी भावना’ संपूर्ण भारतवर्ष की शिक्षण संस्थानों में लागू हो और प्रार्थना के रूप में बोली जाए। इसकी देश की अनेकांनेक भाषाओं में विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में कवरेज देखकर आचार्य श्री ने दोनों हाथों से सैकड़ो श्रद्धालुओं की उपस्थिति में अपना मंगल आशीर्वाद प्रदान किया आचार्यश्री ने कहा कि मेरी भावना तो राष्ट्रगान बननी थी बड़ी होने की वजह से रह गई। आपका प्रयास बहुत सराहनीय अनुकरणीय है। मेरी भावना पर उन्होंने प्रवचन में भी कहा गुणी जनों को देख हृदय में मेरे प्रेम उमड़ आए। इसके शब्द में गागर में सागर भरा हुआ है। समस्त आलेख उन्होंने बड़ी गंभीरता से पढ़े।
विगत 35 वर्षा से पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वर्तमान के श्रवण कुमार आदिनाथ टीवी चैनल के ब्यूरो चीफ पारस जैन ‘पार्श्वमणी’ में आचार्य श्री को बताया कि मेरी एक ही भावना है भारतवर्ष के जितने भी स्टेट हैं सभी जगह स्कूलों में शिक्षण संस्थानों में मेरी भावना को प्रार्थना के रूप में और पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। सबसे बड़ी खुशी की बात यह है कि मप्र सरकार ने कक्षा आठ हिंदी विषय के अंतर्गत इसको प्रथम नंबर पर रखा है। आगामी समय में राजस्थान, उत्तरप्रदेश, गुजरात, बिहार के मुख्यमंत्री सभी को ये मेरी भावना की कवरेज फाइल देने की योजना है। मेरी भावना नर से नारायण पाषाण से परमात्मा तीतर से तीर्थंकर फर्श से अर्श की यात्रा का नाम है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा पारस जैन पार्श्वमणि कोटा को दोनों हाथों से आशीर्वाद प्रदान किया। पार्श्वमणि ने कहा कि गो वात्सल्य जगाओ नगर नगर में सधर्मी सेवा संस्था बनाओ।
कोई भी राजनीतिक दल आपका साथ नहीं देगा। यदि आपकी बहुलता नहीं होगी। 140 करोड़ की आबादी में मात्र 50 से 55 लाख जैन समाज रह चुकी है। यदि हमने जैन समाज की संख्या नहीं बढ़ाई तो हमारे संपूर्ण भारतवर्ष के तीर्थ क्षेत्र, अतिशेष क्षेत्र, सिद्ध क्षेत्र की प्राचीनता, ऐतिहासिकता, प्रमाणिकता, भव्यता, पुरातत्वता को खतरा हो जाएगा और हो रहा है। जैन संस्कृति का शंखनाद यदि करना है तो जैन की संख्या बढ़ानी पड़ेगी।













Add Comment