संतों की सेवा अग्रणी त्यागियों की नगरी सनावद में आचार्य श्री 108 उदार सागर जी महाराज मुनि श्री 108 उपशांत सागर जी महाराज ससंघ मंगल प्रवेश नगर में हुआ। पढ़िए सन्मति काका की रिपोर्ट…
सनावद। संतों की सेवा अग्रणी त्यागियों की नगरी सनावद में आचार्य श्री 108 उदार सागर जी महाराज मुनि श्री 108 उपशांत सागर जी महाराज ससंघ मंगल प्रवेश नगर में हुआ। इंदौर में चातुर्मासरत आचार्य श्री श्री सिद्धक्षेत्र सिद्धवरकूट से यात्रा कर नगर में पधारे, जहां नगर में विराजमान आर्यिका सरस्वती माताजी ससंघ के साथ सभी समाजजन रेल्वे गेट पर पहुंच कर आचार्य संघ की आगवानी की। इस अवसर पर सभी समाजजन जुलूस के रूप में श्री सुपार्श्वनाथ मंदिर एवं श्री पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर में पहुंचे। महिलाओं ने सिर पर कलश रख कर आचार्य श्री की आगवानी की और पाद प्रक्षालन किया गया।
संतों के दर्शन होना भाग्य है, नगर में आना सौभाग्य है – आर्यिका माताजी
आचार्य श्री शांति सागर वर्धमान देशना संत निलय में सभा को संबोधित करते हुए आर्यिका माताजी ने कहा कि संतों के दर्शन होना भाग्य है। नगर में साधु का आना सौभाग्य है और साधु के आने के बाद उनके वचन सुनना अहोभाग्य है। दिगंबर मुनिराज के दर्शन होना बहुत ही भाग्य की बात है कि आज मुनिराज नगर में पधारे हैं। पहले समय में मुनिराज के दर्शन बहुत ही दुर्लभ होते थे। मुनिराज के दर्शन करने से बहुत ही पुण्य का फल मिलता है। इसी क्रम में आचार्य श्री उदार सागर जी न कहा कि सनावद नगरी बहुत ही पावन नगरी है हमारा यहां आना बहुत भाग्य की बात है। यहां से 18 साधुओं ने अपना मार्ग मोक्ष की ओर प्रशस्त किया है।
आप बहुत ही भाग्यशाली हैं कि आपको आज दिगम्बर साधु के दर्शन आसानी से हो रहे हैं। पहले साधु के दर्शन करना बहुत ही मुश्किल था। लेकिन पहले युग में लोगों की भक्ति बहुत ही प्रकाट्य होती थी, लेकिन अब श्रावक की आस्था इतनी प्रकाट्य नहीं रही। अगली कड़ी में शाम को आचार्य श्री एवं माताजी के सानिध्य में गुरुभक्ति आरती एवं प्रश्नमंच आयोजित किए गए। इस अवसर पर सभी समाजजन उपस्थित थे।













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