प्रख्यात जैनाचार्य आचार्य कुंदकुंद के अष्टपाहुड़ ग्रंथ पर आधारित संस्कृत आलेख को राष्ट्रीय शोध ग्रंथ में प्रथम स्थान मिला है। यह सम्मान व्याकरणाचार्य आकाश शास्त्री को प्राप्त हुआ, जिनकी रचना जामिया मिलिया इस्लामिया द्वारा प्रकाशित ‘वाक्सुधा’ पुस्तिका में छपी है। पढ़िए राजीव सिंघई “मोनू की पूरी रिपोर्ट…
नई दिल्ली। नई दिल्ली में प्रकाशित हुई भारतीय दर्शन पर आधारित प्रतिष्ठित शोध पुस्तिका ‘वाक्सुधा’ में व्याकरणाचार्य आकाश शास्त्री द्वारा लिखा गया संस्कृत आलेख कि अष्टपाहुड-सन्दर्भे महाव्रतेभ्यः पूर्वमणुव्रतानामुपादेयता — को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। यह आलेख आचार्य कुंदकुंद स्वामी के अष्टपाहुड़ ग्रंथ के दार्शनिक पक्षों को उजागर करता है और संस्कृत में गहन तात्त्विक विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
इस शोध कार्य को जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की ओर से मान्यता प्राप्त हुई है और इसका प्रकाशन वाक्सुधा प्रकाशन, नई दिल्ली द्वारा किया गया है। इस उपलब्धि को लेकर जैन समाज और संस्कृत विद्वतजनों में गौरव का वातावरण है।
विरासत को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक प्रयास
आकाश शास्त्री ने कहा कि यह केवल मेरी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक विनम्र प्रयास है। यह सब परम पूज्य श्री सुधासागर जी महाराज के आशीर्वाद और मार्गदर्शन से ही संभव हुआ।
इस आलेख को न केवल दार्शनिक गहराई के लिए सराहा गया है, बल्कि इसके माध्यम से आधुनिक युग में संस्कृत विमर्श को पुनर्स्थापित करने के लिए भी इसे विशेष मान्यता मिली है।













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